गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक पर्व है। यह केवल किसी व्यक्ति का सम्मान करने का दिन नहीं, उस ज्ञान, प्रकाश और चेतना का उत्सव है जो गुरु के माध्यम से हमारे जीवन में आती है। यह विचार गुरु पूर्णिमा के पावन उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित ज्ञान संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गुरु वंदना से हुआ। गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आयोजित वैदिक यज्ञ में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने वैदिक मंत्रों का सस्वर उच्चारण कर यज्ञ में लोकमंगल के निमित्त आहुति प्रदान की।
ज्ञान संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा गुरुपूर्णिमा समाज में ज्ञान के प्रसार, नैतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान करने का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार समाज में एकता, कृतज्ञता और अच्छे चरित्र के निर्माण को बढ़ावा देता है। गुरुपूर्णिमा सनातन परंपरा, श्रद्धा और संस्कृति के संगम का पर्व है। गुरु पूर्णिमा समाज में ज्ञान के प्रसार, नैतिक मूल्यों और गुरु शिष्य परंपरा का सम्मान करने का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार समाज में एकता, कृतज्ञता और अच्छे चरित्र के निर्माण को बढ़ावा देता है। गुरु पूर्णिमा संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है। उन्होंने वेदों का विभाजन किया, महाभारत की रचना की और अनेक पुराणों की रचना करके मानव समाज को अमूल्य ज्ञान दिया । इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
डॉ. मिश्र ने कहा ऐसे महान पर्व पर हमें अपने सभी गुरुजनों, माता पिता, शिक्षकों, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना चाहिए जिन्होंने हमारे जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दिया है। कार्यक्रम में आश्रम के विद्यार्थी , सदस्य, शिक्षक आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
