कुरुक्षेत्र, 24 जुलाई। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में तीन दिवसीय संस्कृति बोध परियोजना प्रश्न पत्र एवं प्रश्न मंच हेतु प्रश्न संच निर्माण की अखिल भारतीय कार्यशाला का समापन हुआ। समापन अवसर पर मंचासीन विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की अध्यक्षा डाॅ. ममता सचदेवा, सह सचिव डाॅ. पंकज शर्मा, संस्कृति बोध परियोजना के संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित, प्रबंधक सुधीर कुमार, सदस्य कृष्ण कुमार रहे। कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती मध्य क्षेत्र के संयोजक अम्बिका दत्त कुंडल ने किया। सुधीर कुमार ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया। इस अवसर पर कार्यशाला में आए प्रतिभागियों ने अपने अनुभव कथन साझा करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर आकर सुखद अनुभूति हुई है। संस्थान परिसर में तनावमुक्त वातावरण में प्रश्न पत्र निर्माण सम्बन्धी कार्य भलीभांति सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर संस्थान की अध्यक्षा डाॅ. ममता सचदेवा ने देशभर से आए प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि कार्यशाला में तैयार सामग्री में जो प्रश्न संच का निर्माण हुआ, वह विद्यार्थियों में जिज्ञासा, अध्ययनशीलता, संस्कार और राष्ट्रीय चेतना को और भी अधिक सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और संस्कार जिंदगी जीने के दो मूल मंत्र हैं क्योंकि शिक्षा हमें कभी झुकने नहीं देगी और संस्कार कभी गिरने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति दुनिया की सर्वश्रेष्ठ संस्कृतियों में से एक है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर दृष्टि लगाए हुए है। ऐसे समय में भारत के प्रत्येक नागरिक को भारत की गौरवशाली संस्कृति का बोध ठीक से हो, इसी निमित्त संस्कृति बोध परियोजना का आयाम विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के माध्यम से पूरे देश में आयोजित किया जाता है। तीन दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों ने देशभर में आयोजित होने वाली अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रश्न पत्र एवं अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव हेतु प्रश्न संच का निर्माण किया। कार्यशाला में देशभर से लगभग 115 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
