संसार का भारत एक ऐसा देश है जहां प्रकृति को पूजा जाता है, पेड़ों को देवता माना गया है, नदियों को माँ और धरती को जीवनदाता माना गया है। लेकिन आज, तेजी से होती शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और बढ़ती आबादी के कारण पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है। यह सिर्फ पर्यावरण का संकट नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान भी प्रभावित हो रही है।
यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित प्रकृति संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए। इस अवसर पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों द्वारा आश्रम परिसर में वृक्षारोपण किया गया। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने प्रकृति संवाद कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण एवं अपने जन्मदिन पर वृक्षारोपण का संकल्प लिया।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। वे न केवल हमें ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके वायु को शुद्ध बनाते हैं। पेड़ वर्षा लाते हैं, जमीन की उर्वरता बनाए रखते हैं और पशु पक्षियों को आश्रय देते हैं। जब कोई एक पेड़ लगता है, तो वह न केवल धरती को हरा भरा बनाता है, बल्कि आसपास के वातावरण में भी ठंडक, ताजगी और जीवन की ऊर्जा भर देता है। आज भारत जैसे देश में, जहां गर्मी के मौसम में तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है, पेड़ों की छांव अमूल्य होती है। जल, जंगल एवं जमीन का संरक्षण भारतीय जीवन दर्शन का आधार है।
डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा वृक्षारोपण न केवल पृथ्वी के लिए लाभकारी है बल्कि मानव समाज के लिए भी सहायक है। वृक्ष फल, औषधियाँ, लकड़ी और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। वे शहरों की सुंदरता बढ़ाते हैं, वायु प्रदूषण कम करते हैं और लोगों को विश्राम करने के लिए शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करते हैं। वृक्षारोपण पर्यावरण को संतुलित रखने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और मानव जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।आज आवश्यक है हम सब अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाह करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करे। कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के सदस्य, विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ।
