कुरुक्षेत्र,14 जुलाई। जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार एवं आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला कुरुक्षेत्र के 18 अटल टिंकरिंग लैब  युक्त राजकीय विद्यालयों के प्राचार्य तथा अटल टिंकरिंग लैब  प्रभारी शिक्षकों के लिए एटीएल, रोबोटिक्स एवं एस्ट्रोनॉमी लैब विषय पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 15 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, उमरी में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में जिले के सभी पीएम श्री विद्यालयों के प्राचार्य भी भाग लेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम  का उद्देश्य विद्यालयों में स्थापित अटल टिंकरिंग लैब, रोबोटिक्स एवं एस्ट्रोनॉमी लैब का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना तथा विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक से जोडऩा है।
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं पीएम श्री योजना के अनुरूप विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, डिज़ाइन थिंकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, 3-डी प्रिंटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स  तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से जिले के सभी एटीएल विद्यालयों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि विद्यालयों में स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. तरसेम कौशिक  ने बताया कि जिला कुरुक्षेत्र में इस शैक्षणिक सत्र में  17 सरकारी विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की गई है, जिनमें जीजीएसएसएस बरौट, जीएसएसएस लोहारा, जीएसएसएस मेहरा, जीजीएसएसएस लाडवा, जीएसएसएस गुढ़ा, जीएसएसएस प्रहलादपुर, जीएसएसएस बोधनी, जीएसएसएस पिहोवा, जीएसएसएस गुमथला गढ़ू, जीएसएसएस नलवी, जीएसएसएस कलसाना, जीएसएसएस हरिपुर, जीएसएसएस धुराला, जीजीएसएसएस थानेसर, जीएसएसएस उमरी, जीएसएसएस पिपली, जीएसएसएस ज्योतिसर तथा पूर्व में स्थापित जीएसएसएस कनिपला शामिल हैं। इन सभी विद्यालयों में आधुनिक उपकरणों से युक्त प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की नवीनतम तकनीकों का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. तरसेम कौशिक  ने बताया कि  प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अटल टिंकरिंग लैब की कार्यप्रणाली, रोबोटिक्स किट, माइक्रोकंट्रोलर, सेंसर आधारित परियोजनाएं, 3-डी प्रिंटिंग, कोडिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिज़ाइन थिंकिंग तथा एस्ट्रोनॉमी लैब में उपलब्ध उपकरणों के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही विद्यालय स्तर पर नवाचार आधारित परियोजनाओं, विज्ञान मॉडल निर्माण तथा विद्यार्थियों में अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित करने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि इन प्रयोगशालाओं का उद्देश्य केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है। उन्होंने सभी प्राचार्यों से प्रशिक्षण के उपरांत अपने-अपने विद्यालयों में नियमित रूप से एटीएल गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करने तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को इन गतिविधियों से जोडऩे का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले के सभी एटीएल विद्यालयों में नवाचार आधारित शिक्षा को नई दिशा देगा तथा विद्यार्थी भविष्य की उभरती हुई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे। इसके माध्यम से जिले के सरकारी विद्यालय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी तैयार करेंगे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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