चंडीगढ़। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से कर्मचारियों के विभिन्न भत्तों में व्यापक और व्यावहारिक संशोधन की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान भत्ता व्यवस्था बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की वास्तविक लागत के अनुरूप नहीं रह गई है।
महासंघ का कहना है कि आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन पर लगातार बढ़ रहे खर्च से कर्मचारियों को कई आवश्यक व्यय अपनी जेब से उठाने पड़ रहे हैं। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि आयोग को सौंपे ज्ञापन में महंगाई भत्ते की वर्तमान गणना प्रणाली में बदलाव का सुझाव दिया गया है।
12 माह की बजाय तीन या छह माह की औसत अवधि के आधार पर महंगाई भत्ता तय किया जाए। प्वाइंट-टू-प्वाइंट गणना लागू हो तथा 25 प्रतिशत महंगाई भत्ता होने पर उसे मूल वेतन और मूल पेंशन में विलय किया जाए। महासंघ ने मकान किराया भत्ता (एचआरए) में भी व्यापक संशोधन की मांग की है।
प्रस्ताव के अनुसार 50 लाख से अधिक आबादी वाले महानगरों में 40, पांच से 50 लाख आबादी वाले शहरों में 35 तथा पांच लाख से कम आबादी वाले शहरों और कस्बों में 30 प्रतिशत एचआरए दिया जाना चाहिए। साथ ही एचआरए को महंगाई भत्ते से जोड़ने और शहरों के वर्गीकरण की समय-समय पर समीक्षा करने की भी मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि परिवहन भत्ता, यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ते की वर्तमान दरें वास्तविक खर्चों की तुलना में काफी कम हैं। इसलिए इनमें पर्याप्त वृद्धि की जाए, सरकारी कार्यों के लिए सभी कर्मचारियों को हवाई यात्रा की सुविधा मिले तथा यात्रा संबंधी भत्तों को महंगाई के अनुसार स्वतः संशोधित करने की व्यवस्था बनाई जाए।
उन्होंने बच्चों के शिक्षा भत्ते को उच्च शिक्षा तक बढ़ाते हुए प्रति बच्चा 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने, छात्रावास अनुदान को शामिल करने तथा इसे भी महंगाई भत्ते से जोड़ने का सुझाव दिया है।
इसके अलावा जोखिम, कठिन क्षेत्र, रात्रि ड्यूटी, धुलाई, प्रतिनियुक्ति, ओवरटाइम और वर्दी सहित अन्य विशेष भत्तों का भी समयानुकूल पुनरीक्षण करने तथा कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न ऋण एवं एडवांस की सीमा बढ़ाने की मांग की गई है।
