करनाल, 25 जून। सहायक-निदेशक(अभियोजन) एवं जिला न्यायवादी करनाल डॉ. पंकज सैनी ने बताया कि सरकार व उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार एनडीपीसी एक्ट नशा संबंधी मामलों में जिला को नशा मुक्त करने का प्रयास जारी है। कोर्ट में गवाहों व सबूतों को सरकारी वकीलों के द्वारा ठोस मजबूती के साथ पेश करते हुए आरोपियों को अधिक से अधिक सजा दिलाने का उदेश्य रहता है। सजा के प्रावधान से नशे के कारोबार से संलिप्त लोगों को भी यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि इस कारोबार में संलिप्त होना सलाखों के पीछे पहुंचना है।
डॉ. पंकज सैनी ने बताया कि सरकार प्रदेश को नशा मुक्त बनाने एवं समाज को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से नशा कानूनों को सख्ती से लागू कर रही है। इस दिशा में एनडीपीएस एक्ट की वर्षिक रिपोर्ट में करनाल जिला की नशा संबंधी मामलो में सजा सुनाने में 80 प्रतिशत औसतन रही है।
101 केसों में 110 आरोपियों को सजा सुनाकर भेजा सलाखों के पीछे
डॉ. पंकज सैनी ने बताया कि वर्ष 2024 से मई 2026 के विभिन्न एनडीपीएस एक्ट मामलों में अफीम, गांजा, चरस व स्मैक व अन्य मादक पदार्थ आरोपियों से अधिक मात्रा में बरामद किए गए। जो इस प्रकार से है-1 जनवरी 2026 से 31 जुलाई 2026 तक नशा तस्करी मामलों में 46 केसों में 52 आरोपियों को सजा सुनाई गई। इसी प्रकार 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक 101 केसों में 110 आरोपियों को सजा सुनाकर सलाखों के पीछे भेजा गया। जबकि वार्षिक रिपोर्ट 2024 अनुसार 204 केसों में से 178 केसों में आरोपियों को सजा सुनाकर जेल भेजा गया। यह सभी मामले मध्यम व अधिक मात्रा में आरोपियों से मिले मादक पदार्थो के एनडीपीएस एक्ट के थे, जो अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश की अदालतों में विचाराधीन चल रहे थे। नशा संबंधी मामलों को लेकर करनाल जिला में साल 2025 में स्पेशल कोर्ट भी बनाई गई है।
नशा को लेकर छात्रों को किया जा रहा है जागरूक
डॉ. पंकज सैनी ने बताया कि नशा संबंधी मामलों को गंभीरता लेते हुए प्रत्येक माह उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाती है। बैठक में पुलिस विभाग, जिला न्यायवादी, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, ड्रग नियंत्रण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, नोडल अधिकारी, एचएसएनसीबी करनाल आदि अधिकारी बैठक में शामिल होते हैं। जिसमें उपायुक्त द्वारा समय-समय पर सभी अधिकारियों को स्कूल व कॉलेज के साथ-साथ जनता को नशा संबंधी बुराईयों के बारे में जागरूक करने संबंधी कैम्प लगाए जाने के आदेश दिए जाते हैं, ताकि बच्चों व बड़ों को नशा संबंधी बुराईयों के बारे में जागरूक किया जाए।
