कुरुक्षेत्र, 25 जून।
ब्रह्माकुमारीज: विश्व शांति धाम सेवा केंद्र, कुरुक्षेत्र में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती (मम्मा) का 61वाँ पुण्य स्मृति दिवस ‘आध्यात्मिक ज्ञान दिवस’ के रूप में श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया गया। इस अवसर पर राजयोगिनी बी.के. सरोज बहन ने मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनके साथ बी.के. राधा, बी.के. पुष्पा, बी.के. लता, बी.के. नेहा, बी.के. प्रियंका, बी.के. आरती, बी.के. सिमरन एवं बी.के. भारती सहित अनेक भाई-बहनों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके दिव्य गुणों को जीवन में धारण करने का संकल्प लिया।
राजयोगिनी बी.के. सरोज बहन ने मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती के प्रेरणादायी जीवन एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बचपन में उनका नाम राधे था। मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने ईश्वरीय यज्ञ सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात उन्होंने संस्थान की जिम्मेदारियों को इतनी कुशलता से निभाया कि सभी उन्हें स्नेहपूर्वक ‘मम्मा’ कहने लगे। वे अध्ययन, गीत, कविता एवं नृत्य जैसी अनेक प्रतिभाओं से सम्पन्न थीं। उनके मधुर स्वर में की जाने वाली ‘ओम ध्वनि’ के कारण वे ‘ओम राधे’ के नाम से विख्यात हुईं। उनका व्यक्तित्व इतना दिव्य एवं आकर्षक था कि उन्हें देखकर लोगों को देवी स्वरूप का अनुभव होता था। उन्होंने लाखों आत्माओं को मातृत्व का स्नेह प्रदान कर अपने ममतामयी स्वरूप का परिचय दिया।
बी.के. सरोज बहन ने कहा कि मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती आध्यात्मिक ज्ञान, पवित्रता एवं सर्वशक्तियों की साकार प्रतिमूर्ति थीं। उनका संपूर्ण जीवन ईश्वरीय सेवा, त्याग, तपस्या और श्रेष्ठ संस्कारों का अनुपम उदाहरण है। आज भी उनका जीवन हम सभी को आत्मिक उन्नति और श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत बी.के. मुकेश ने देवियों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शक्तियों के मंदिर प्रायः ऊँचे पर्वतों पर बनाए जाते हैं क्योंकि पर्वत पवित्रता, दृढ़ता और ऊँचे जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं। उन्होंने त्याग, तपस्या, नम्रता, संतुष्टता, मधुरता, गंभीरता, आज्ञाकारिता, सहनशीलता, अडिगता एवं स्नेह जैसे दिव्य गुणों का वर्णन करते हुए सभी को इन गुणों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा दी। साथ ही संकल्प करवाया कि हम सभी पवित्रता, निर्माणता और योगयुक्त जीवन को अपनाकर विश्व को श्रेष्ठ बनाने में अपना योगदान देंगे। इस दौरान बी.के. बिमला एवं बी.के. रघुवीर भाई ने गीतों के माध्यम से मीठी मम्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं कुमारी वसुधा एवं तन्वी ने एक्शन सॉन्ग प्रस्तुत कर मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की दिव्य पालना का सुंदर अनुभव सभी भाई-बहनों को कराया। बी के डॉक्टर आर डी शर्मा ने अपने स्कूली समय के सरस्वती मां की वंदना का अनुभव सांझा किया और बताया कि आज उन्हें सरस्वती मां अनुकंपा से सब प्राप्त हो गया है। अंत में सभी ने मातेश्वरी के आदर्शों पर चलने तथा उनके दिव्य गुणों को जीवन में धारण करने का संकल्प लिया। तत्पश्चात ईश्वरीय प्रसाद वितरित किया गया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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