चंडीगढ़। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सीमा घटाने को लेकर हरियाणा का प्रस्ताव फिलहाल लटक सकता है। हरियाणा सरकार ने मांग की थी कि पांच जिलों महेंद्रगढ़, जींद, भिवानी, चरखी दादरी और करनाल को एनसीआर से बाहर किया जाए क्योंकि कड़े नियमों के कारण वहां विकास परियोजनाओं में दिक्कत आ रही है।

मंगलवार को होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक के प्रस्ताव के मुताबिक 55,083 वर्ग किमी में विस्तृत एनसीआर के मौजूदा दायरे में कोई कटौती नहीं की जाएगी। बोर्ड इसे यथावत रखने का प्रस्ताव पारित कर सकता है। इससे हरियाणा का सब रीजनल प्लान पहले की तरह ही लागू रहेगा।
दिल्ली पर जनसंख्या के दबाव को कम करने के लिए हरियाणा में पचंग्राम सहित उत्तर प्रदेश, और राजस्थान में आठ नई ग्रीनफील्ड टाउनशिप बनाने के प्रस्ताव को बैठक में मंजूरी मिल सकती है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद औद्योगिक शहर की तर्ज पर विकसित होने वाले यह शहर पूरी तरह स्मार्ट और आत्मनिर्भर होंगे। पानी, बिजली, कचरा निस्तारण जैसी सारी सुविधाएं शहर खुद निपटेगा।

कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे के किनारे पंचग्राम और उत्तर प्रदेश में न्यू नोएडा या यमुना सिटी का प्रस्ताव है। इन शहरों को हाई स्पीड रेल कारिडोर के करीब बसाया जाएगा। रेलवे स्टेशन या रैपिड ट्रांजिट नोड के चारों तरफ ही आफिस, बाजार और रिहायशी इमारतें होंगी, जिससे लोगों को सीधे सुपरफास्ट ट्रेन मिल जाए।

बैठक में दिल्ली-पानीपत-करनाल, दिल्ली-अलवर, दिल्ली-नोएडा-गाजियाबाद रैपिड रेल कारिडोर पर फोकस रहेगा। दिल्ली-मेरठ कारिडोर के बाद अब दिल्ली-गुरुग्राम-शाहजहांपुर-नीमराणा-अलवर और दिल्ली-पानीपत-करनाल जैसे आठ नमो भारत कारिडोर के निर्माण को गति दी जाएगी। लंबी दूरी और कम स्टापेज वाली सुपरफास्ट ट्रेनों के लिए एक स्पेशल मास ट्रांजिट रेल सिस्टम लाने पर भी चर्चा होगी। आर्बिटल रेल बिना रुके सीधे दिल्ली और बाहरी एनसीआर टाउनशिप को जोड़ेंगी।

दिल्ली से आधा घंटे में पहुंच जाएंगे गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत

प्रस्ताव है कि दिल्ली से एनसीआर के सभी प्रमुख शहरों यथा पानीपत, करनाल, गुरुग्राम, अलवर, बुलंदशहर, हापुड़, खुर्जा और मेरठ की दूरी को समेटकर 30 मिनट कर दिया जाए। इसके लिए नमो भारत के नए कारिडोर, आर्बिटल रेल नेटवर्क और हाईस्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन के प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है। रीजनल मूवमेंट के लिए हेली-टैक्सी सेवाओं को हरी झंडी दी सकती है।

टियर-1 शहरों गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत जैसे शहरों के बीच आधे घंटे में सफर होगा। सुपरफास्ट और एक्सप्रेस मास ट्रांजिट रेल के जरिए ये हाईस्पीड कनेक्टिविटी दी जाएगी। टियर-2 शहरों जींद, करनाल, हापुड़, बुलंदशहर को इंटरसिटी ट्रेनों के जरिए एक घंटे की कनेक्टिविटी के दायरे में लाया जाएगा। टियर-3 में शामिल अलवर, पानीपत या मेरठ के बाहरी इलाकों को रैपिड रेल यानी नमो भारत ट्रेन से कनेक्ट करके, एक्सप्रेस-वे और चौड़ी सड़कों के नेटवर्क के जरिये कार या सड़क मार्ग से अधिकतम दो से तीन घंटे में दूरी तय करने का लक्ष्य है।

पांच आधुनिक शहर केवल रिहायशी कालोनियां नहीं

कुंडली–मानेसर–पलवल एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर दो से छह किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किए जाने वाले पांच नए आधुनिक शहरों को केवल रिहायशी कालोनियों के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के एकीकृत शहरी केंद्रों के तौर पर विकसित करने की योजना है। इनमें आवास, रोजगार, उद्योग, डिजिटल सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र और सामाजिक बुनियादी ढांचे को एक साथ जोड़ा जाएगा।

एनसीआर-2041 की रूपरेखा भी आर्थिक गलियारों, नियोजित शहरीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर देती है। केएमपी एक्सप्रेस-वे पहले ही हरियाणा के कई जिलों को जोड़ने वाला रणनीतिक कारिडोर बन चुका है। ऐसे में इसके आसपास नियोजित विकास से उद्योग, लॉजिस्टिक्स, आवास और सेवा क्षेत्र को नया आधार मिल सकता है।

बड़ा आर्थिक इंजन बनेगा हरियाणा

एनसीआर-2041 के प्रस्तावित ढांचे के तहत राज्य खुद को आटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, निर्माण, टेक्सटाइल और सेवा क्षेत्र के बड़े आर्थिक इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहता है। मानेसर–बावल आटो क्लस्टर, गुरुग्राम–फरीदाबाद औद्योगिक विस्तार, झज्जर–सोनीपत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और महेंद्रगढ़ के नांगल चौधरी क्षेत्र में प्रस्तावित मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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