कुरुक्षेत्र, 12 जून। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में संस्कृत पालि एवं प्राकृत विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभागाध्यक्षा प्रो. कृष्णा देवी ने बताया कि विभाग की शुरुआत संस्कृत, भारतीय दर्शन, धर्म, भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व के उच्च अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। प्रारंभ में विश्वविद्यालय की पहचान एक संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में थी, जो बाद में बहु-संकाय विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ।
संस्कृत पालि एवं प्राकृत विभाग की अध्यक्षा प्रो. कृष्णा देवी ने बताया कि वर्ष 1972 में पालि एवं प्राकृत अध्ययन को शामिल किए जाने के बाद विभाग का नाम संस्कृत, पालि एवं प्राकृत विभाग रखा गया। विभाग में वैदिक अध्ययन, संस्कृत व्याकरण एवं भाषाविज्ञान, भारतीय दर्शन एवं तर्कशास्त्र तथा संस्कृत साहित्य एवं काव्यशास्त्र जैसे चार प्रमुख विशेषज्ञ समूह उपलब्ध हैं, जिन्हें यूजीसी-नेट पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयार किया गया है। विभाग राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से जुड़ा हुआ है तथा समय-समय पर विशिष्ट व्याख्यान, संगोष्ठियां, कार्यशालाएं और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करता है। उन्होंने बताया कि विभाग को देश-विदेश के अनेक ख्यातिप्राप्त विद्वानों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है, जिनमें डॉ. सत्यव्रत शास्त्री, डॉ. डी.बी. सेन शर्मा, डॉ. कपिल देव शास्त्री, डॉ. डी.एन. शास्त्री, डॉ. शिवराज शास्त्री, डॉ. श्रीनिवास शास्त्री, डॉ. जगदेव सिंह, डॉ. सूर्यकांत, डॉ. बलदेव सिंह, डॉ. गोपिका मोहन भट्टाचार्य, डॉ. मान सिंह, डॉ. परमानंद गुप्ता, डॉ. अमर सिंह, डॉ. उषा रानी गुप्ता, डॉ. विजय रानी, डॉ. भीम सिंह, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. अरुणा शर्मा, डॉ. आर.पी. मिश्रा तथा डॉ. एस.एम. मिश्रा सहित अनेक विद्वान शामिल हैं।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एम.ए. संस्कृत (दो वर्षीय) कार्यक्रम में 60 सीटें तथा एक वर्षीय एम.ए. संस्कृत कार्यक्रम में 27 सीटें उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त संस्कृत भाषा में एक वर्षीय ऑनलाइन डिप्लोमा (सायंकालीन) पाठ्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है, जिसमें 10 सीटें निर्धारित हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
