चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा की मेजबानी में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र के जोन-2 सम्मेलन ने न केवल संसदीय विमर्श को नई दिशा दी, बल्कि उत्कृष्ट आयोजन, अनुकरणीय प्रबंधन और भारतीय आतिथ्य परंपरा की ऐसी मिसाल भी पेश की, जिसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दी।
दो दिवसीय सम्मेलन के सफल आयोजन के बाद विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इसे राष्ट्रीय महत्व का आयोजन बना दिया।
हरविन्द्र कल्याण ने सभी अतिथियों को इस आयोजन में भागीदारी तथा इसे सारगर्भित बनाने के लिए आभार पत्र लिखा है। दो दिनों तक चले सम्मेलन में उत्तर भारत के पांच राज्यों सहित 13 विधानमंडलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
देश भर से आए लगभग 40 वक्ता
देश भर से आए लगभग 40 वक्ताओं ने विकसित भारत-2047, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, जनभागीदारी और भविष्य की चुनौतियों जैसे विषयों पर गंभीर विचार रखे। सम्मेलन के दौरान यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ-साथ जागरूक समाज भी उतना ही आवश्यक है।
सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली और सहभागी वातावरण रही। उद्घाटन सत्र में हरियाणा विधानसभा का सदन एक तरह से ‘लघु भारत’ के रूप में दिखाई दिया, जहां विभिन्न राज्यों, भाषाओं और राजनीतिक विचारधाराओं के प्रतिनिधि लोकतांत्रिक संवाद के साझा मंच पर एकत्र हुए। प्रतिभागियों ने इस व्यवस्था की खुलकर सराहना की।
हरविन्द्र कल्याण ने सम्मेलन की सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास, सूक्ष्म योजना और सेवा भावना के कारण ही सम्मेलन को राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली। सम्मेलन के समापन पर चार औपचारिक संकल्प पारित किए गए।
वहीं, उत्कृष्ट मेजबानी और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण के प्रति आभार का विशेष अलिखित प्रस्ताव भी ध्वनिमत से स्वीकार किया गया, जो आयोजन की सफलता पर प्रतिभागियों की मुहर माना जा रहा है।
