पंचकूला। पिंजौर में कारोबारी जितेश मनोचा हत्या मामले में नया मोड़ आ गया है। मामले में गिरफ्तार चार आरोपितों पुलिस ने दो दिन के रिमांड के बाद सोमवार को कालका कोर्ट में पेश किया, जहां से चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वहीं अदालत ने आरोपितों की तरफ से पुलिस हिरासत के दौरान प्रताड़ना, सार्वजनिक अपमान और मानवाधिकार उल्लंघन के लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल बोर्ड से जांच कराने और संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं।
मामले में आरोपित खुशदीप सिंह उर्फ दीपी, मनप्रीत सिंह उर्फ मनी, मनीष कुमार और रोहित मेहता शामिल हैं। सुनवाई के दौरान आरोपित रोहित मेहता की ओर से एक आवेदन दायर कर आरोप लगाया गया कि पुलिस हिरासत के दौरान आरोपितों को प्रताड़ित किया गया।
उनके सिर जबरन मुंडवाए गए, नंगे पैर चलाया गया और उनकी तस्वीरें व वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। बचाव पक्ष ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 का उल्लंघन बताया और आरोपितों की रिहाई, स्वतंत्र मेडिकल जांच और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
दो ने की थी हिरासत से भागने की कोशिश
सरकारी वकील ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि दो आरोपितों ने पुलिस हिरासत से भागने का प्रयास किया था, जिसके दौरान उन्हें चोटें लगीं और इस संबंध में अलग से मामला भी दर्ज किया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और घटना के सीसीटीवी फुटेज में आरोपित दिखाई दे रहे हैं।
जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश
अदालत ने आदेश में कहा कि आरोपितों की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसके लिए सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल पंचकूला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को तीन चिकित्सकों और एक मनोचिकित्सक/मनोवैज्ञानिक का मेडिकल बोर्ड गठित कर सभी आरोपितों की विस्तृत चिकित्सीय जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट 10 जून तक सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश करने को कहा गया है।
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी आदेश
इसके अलावा अदालत ने पिंजौर थाना और सीआईए/क्राइम ब्रांच चंडीमंदिर की पांच से आठ जून के बीच की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के भी आदेश जारी किए गए हैं। आरोपितों को 20 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया जाएगा।
