पंचकूला। 200 करोड़ की जमीन के मालिकाना हक के विवाद में सोमवार को नया मोड़ आया। होटल मालिक ने जमीन पर अपना दावा जताते हुए नगर निगम के मालिकाना हक के दावे को खारिज कर दिया है।

होटल मालिक ने दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि संबंधित भूमि कभी भी नगर निगम पंचकूला की संपत्ति नहीं रही। होटल पक्ष का कहना है कि राजस्व रिकाॅर्ड में वर्ष 1912 से लेकर आज तक उक्त भूमि का मालिकाना हक गांव चौकी के मूल भूमिधारकों और उनके उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज रहा है।

होटल प्रबंधन के अनुसार न तो नगर निगम का इस भूमि पर कभी स्वामित्व रहा, न कब्जा और न ही किसी प्रकार का प्रशासनिक नियंत्रण। उनका कहना है कि गांव चौकी के मूल भूमि धारक वर्ष 1950 से भी पहले से अपने हिस्से के अनुसार भूमि पर काबिज और मालिक रहे हैं।

दो बार सीएलयू मंजूरी

होटल पक्ष ने बताया कि हरियाणा सरकार ने होटल परियोजना के लिए वर्ष 1992 और 2011 में दो बार भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनुमति प्रदान की थी। इसके अलावा वर्ष 1999 में राज्य सरकार ने इस भूमि को अधिग्रहण प्रक्रिया से भी बाहर कर दिया था।

प्रबंधन का तर्क है कि यदि भूमि के स्वामित्व को लेकर कोई संदेह होता तो तत्कालीन चौधरी बंसीलाल और चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली सरकारें ऐसी महत्वपूर्ण मंजूरियां नहीं देतीं। उनका कहना है कि सीएलयू जारी करने से पहले संबंधित विभाग स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड की पूरी जांच करते हैं।

वैध बिक्री विलेखों के आधार पर हुई खरीद

होटल प्रबंधन के मुताबिक गांव चौकी के मूल मालिकों और उनके उत्तराधिकारियों ने समय-समय पर विधिवत पंजीकृत बिक्री विलेखों के माध्यम से भूमि होटल संचालक एके दहिया को बेची थी। सभी दस्तावेजों का सत्यापन उप-पंजीयक कार्यालय पंचकूला द्वारा किया गया तथा राजस्व विभाग ने उनके आधार पर नामांतरण (म्यूटेशन) भी स्वीकृत किए।

प्रबंधन का कहना है कि भूमि के प्रत्येक लेन-देन का रिकॉर्ड सरकारी अभिलेखों में दर्ज है और आज तक किसी सक्षम न्यायालय अथवा राजस्व प्राधिकरण ने इन दस्तावेजों को अवैध घोषित नहीं किया है। ऐसे में उनका स्वामित्व कानूनी रूप से स्थापित और सुरक्षित है।

कलेक्टर ने नहीं किया कोई हस्तांतरण

होटल पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि यह धारणा गलत है कि उपायुक्त या कलेक्टर ने किसी आदेश के माध्यम से भूमि होटल मालिक के नाम ट्रांसफर की थी। उनके अनुसार स्वामित्व बिक्री दस्तावेजों के आधार पर मूल भूमिधारकों से प्राप्त हुआ था।

साथ ही प्रबंधन का कहना है कि यदि भूमि कभी ग्राम पंचायत की संपत्ति ही नहीं थी तो बाद में नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने मात्र से उस पर नगर निगम का अधिकार स्थापित नहीं हो सकता।

2024 के आदेश में हुआ विस्तृत परीक्षण

होटल प्रबंधन के अनुसार 16 जनवरी 2024 को कलेक्टर पंचकूला द्वारा पारित आदेश में राजस्व रिकॉर्ड, बिक्री दस्तावेज, नामांतरण रिकॉर्ड, चकबंदी अभिलेख और वंशावली रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया गया था। आदेश में यह निष्कर्ष निकाला गया कि विक्रेता भूमि के वैध मालिक थे और उन्हें अपने उत्तराधिकार के आधार पर भूमि बेचने का पूरा अधिकार प्राप्त था।

होटल पक्ष का दावा है कि नगर निगम अब तक ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया है जिससे यह साबित हो सके कि विवादित भूमि कभी ग्राम पंचायत चौकी की संपत्ति थी।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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