कुरुक्षेत्र, 28 मई : साधु संतों का कार्य सिर्फ मंदिरों या धर्म स्थानों में बैठने के लिए नहीं बल्कि समाज को सही दिशा दिखाना एवं समाज कल्याण के कार्य करना है। समाज को सच्चाई का मार्ग दिखाना, लोगों को सही और गलत में फर्क समझाना तथा जरूरतमंदों की मदद करना भी संत समाज का कार्य है। यह विचार जग ज्योति दरबार में भीषण गर्मी में कठोर पंच धूणी अग्नि तपस्या कर रहे महंत राजेंद्र पुरी ने वीरवार को दर्शनों के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए व्यक्त किए। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने अग्नि तपस्या में बैठे महंत राजेंद्र पुरी पर पुष्प वर्षा करते हुए परिक्रमा की। अग्नि तपस्या के दर्शन करने चण्डीगढ़, अम्बाला, सोनीपत, रोहतक, यमुनानगर, सिरसा, फतेहाबाद, जींद व दिल्ली इत्यादि से भी श्रद्धालु पहुंचे। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि सदियों से संत महापुरुषों ने जन कल्याण व राष्ट्रहित के लिए कठोर तप साधना का मार्ग चुना है। इन्हीं संतों के कारण ही भारतीय संस्कृति मजबूत है। उन्होंने कहा कि समाज में अनेकों उदाहरण मौजूद हैं कि अच्छे लोगों की रक्षा और बुरे कामों को रोकने के लिए समय-समय पर परमात्मा को भी मानव स्वरूप में धरती पर अवतरण होना पड़ा है। धरती पर कुछ लोग आगे आते हैं जो खुद की अच्छाई से दूसरों को भी अच्छे रास्ते पर चलने की सीख देते हैं। जब समाज में अंधेरा बढ़ता है, तब यही संत लोग दीपक बनते हैं और रास्ता दिखाते हैं। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि लोक कल्याण एवं राष्ट्रहित के लिए संत महापुरुषों ने कठोर तप साधना का मार्ग चुना है। अपना सर्वस्व जीवन मानवता की सेवा हेतु अर्पित करते हुए देश व समाज का कल्याण किया है। भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही साधु-संतों का एक विशेष महत्व रहा है। जब कभी समाज के कल्याण या समाज के पथ प्रदर्शक की बातें की जाती हैं तो सबसे पहले संत महापुरुषों को याद किया जाता है। संत महापुरुष ही अपने ज्ञान और तप की ताकत से लोगों को समस्याओं से मुक्ति दिलाते रहे हैं। इस अवसर पर जीत सिंह, महेंद्र पाल, मनोज कुमार अवस्थी, विजेंद्र सिंह, विजय कुमार, विजय गुप्ता, अजय कुमार, अशोक गर्ग, नरेंद्र सिंह, कुलविंदर कौर, हरप्रीत कौर, सुरजन सिंह, मुल्तान सिंह, सोनिया, एस.के. गुप्ता, दीप कमल, रविंद्र सिंह, चेतन कुमार, अजय राठी, अक्षय राठी एवं विजय राठी भी मौजूद रहे।
