आयुष योग सहायकों के लिए 15 दिवसीय आहार तथा योग चिकित्सा प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ
करनाल, 2 अप्रैल। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉक्टर सतपाल ने बताया कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के आदेशानुसार तथा उपायुक्त उत्तम सिंह के मार्गदर्शन में जिला करनाल में 2 से 16 अप्रैल तक आयुष योग सहायकों के लिए 15 दिवसीय आहार तथा योग चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर लगाया जा रहा है। यह शिविर व्यासा नई दिल्ली तथा आयुष विभाग करनाल के संयुक्त तत्वाधान में लगाया जा रहा है। कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त उत्तम सिंह, सांसद प्रतिनिधि कविंद्र राणा, जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉक्टर सतपाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी पूजा, योग कोऑर्डिनेटर डॉ राजपाल, योग विशेषज्ञ डॉ अमित पुंज, डॉ अंशुमन, डॉ शैलेश तथा आयुर्वेद फार्मासिस्ट नरेश द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया।
इस मौके पर उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि आयुष योग सहायकों के लिए आयोजित इस 15 दिवसीय आहार तथा योग चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर प्रतिदिन प्रात: 7.00 बजे से 11.00 तक आहार तथा योग चिकित्सा पर व्यासा बेंगलुरु प्रशिक्षण संस्थान से आए अनुभवी प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश तथा विदेश में योग पर विभिन्न अनुसंधान हुए हैं जिन शोधों में यह पाया गया कि योग द्वारा विभिन्न बीमारियों का समाधान घर पर रहकर ही किया जा सकता है, इसी के दृष्टिगत सभी योग सहायकों को विशेष आहार तथा योग प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि जनसाधारण को इसका लाभ मिल सके।
इस अवसर पर कविंद्र राणा ने कहा कि सभी योग सहायक इस प्रशिक्षण को अच्छी प्रकार से सीखें तथा अपने-अपने ड्यूटी स्थल पर जाकर सभी गांव वासियों को अच्छे प्रकार से योग सिखाएं। उन्होंने कहा कि जैसा कि आयुर्वेद का मूल मंत्र है— स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना ही सर्वोपरि है। आइए, योग को अपनाएं और एक रोगमुक्त जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
योग विशेषज्ञ डॉ अमित पुंज ने बताया कि आज की आधुनिक जीवनशैली में हमारी सबसे बड़ी अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है—योग। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां सुख-सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन हमारा स्वास्थ्य निरंतर गिरता जा रहा है। विशेष रूप से गैर-संचारी रोग आज एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुके हैं। योग और एनसीडीज्र का संबंध – गठिया- मधुमेह- उच्च रक्तचाप- पाचन विकार- महिला स्वास्थ्य और योग – मानसिक स्वास्थ्य- वर्तमान समय में अवसाद और चिंता शारीरिक रोगों से भी अधिक गंभीर हो गए हैं। योग का महत्वपूर्ण अंग ध्यान मस्तिष्क की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है। यह हमें एकाग्रता प्रदान करता है और मानसिक तनाव को दूर कर सकारात्मकता का संचार करता है।
अंत में, बताया कि योग कोई अस्थायी उपचार नहीं, बल्कि एक पूर्ण जीवन दर्शन है। यदि हम प्रतिदिन मात्र 30 से 45 मिनट योग को समर्पित करें, तो हम न केवल इन जानलेवा गैर-संचारी रोगों तथा आधुनिक जीवन शैली की अन्य प्रकार की बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और ऊर्जावान राष्ट्र का निर्माण भी कर सकते हैं।
