अतिरिक्त उपायुक्त राहुल रईया ने टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित
करनाल, 2 अप्रैल। 
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत वीरवार को लघु सचिवालय के सभागार में टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में गोल्ड कैटेगरी में चयनित जिला की 13 ग्राम पंचायतों को अतिरिक्त उपायुक्त राहुल रईया द्वारा टीबी मुक्त ग्राम पंचायत घोषित करते हुए प्रमाण पत्र व महात्मा गांधी जी की स्वर्ण प्रतिमा भेंट की गई। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त ने सभी सरपंचों, सक्षम व्यक्तियों एवं सामाजिक संगठनों से आह्वान किया कि वे जनभागीदारी के तहत आगे आएं और टीबी मरीजों को न्यूट्रिशन किट उपलब्ध करवाने में सहयोग करें, ताकि मरीजों के स्वास्थ्य में शीघ्र सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान भारत सरकार की 2025 तक  तपेदिक (टीबी) को खत्म करने की एक पहल है, जो स्थानीय पंचायतों के माध्यम से जागरूकता, शीघ्र निदान, और उपचार सुनिश्चित करती है। इसके तहत गांवों में टीबी के मामलों की जांच, मरीजों को सहायता और निक्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
जिला क्षय रोग अधिकारी सिम्मी कपूर ने बताया कि जिला में गत वर्ष कुल 113 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इनमें से 13 ग्राम पंचायतों को गोल्ड, 30 को सिल्वर तथा 70 को ब्रॉन्ज कैटेगरी में प्रमाणित किया गया है, जो जिले की स्वास्थ्य सेवाओं एवं जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। कार्यक्रम के दौरान इन 13 गोल्ड कैटेगरी ग्राम पंचायतों के साथ-साथ संबंधित गांवों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं आशा वर्कर्स को भी उनके सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि टीबी उन्मूलन की दिशा में जिला के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
डीटीओ डॉ सिम्मी कपूर ने बताया कि टीबी के प्रमुख लक्षणों में लगातार खांसी आना (दो सप्ताह से अधिक), बुखार, वजन कम होना, रात को पसीना आना एवं भूख में कमी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि टीबी की जांच एवं उपचार सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पूर्णत: नि:शुल्क उपलब्ध है।
कार्यक्रम के दौरान जिला कार्यक्रम समन्वयक कमल शर्मा, जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स कोऑर्डिनेटर स्नेह राणा, अकाउंटेंट रशमी, एसटीएस नीलोखेड़ी संजय कुमार तथा एसटीएस रजनेश कुमारी उपस्थित रहे। उन्होंने इस उपलब्धि को सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताते हुए भविष्य में भी टीबी उन्मूलन के लिए इसी प्रकार निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।

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