पंचकूला। 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच तेज हो रही है। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की बैंकर पत्नी से पूछताछ हो सकती है। एसीबी द्वारा अब तक गिरफ्तार आरोपितों से इस बैंकर महिला अधिकारी के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।

हालांकि, एसीबी पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही पूरे प्रकरण को सरकार के संज्ञान में लाकर पूछताछ करने के मूड में है। बताया जा रहा है कि इस महिला बैंक अधिकारी ने अपने पति के रसूख के चलते कई विभागों से सरकारी फंड बैंकों को दिलवाने में सहयोग किया है।

सूत्रों के अनुसार, अभी तक इस घोटाले में महिला बैंक अधिकारी के सीधे तौर पर शामिल होने के ठोस प्रमाण एसीबी के पास नहीं हैं, लेकिन गिरफ्तार आरोपितों ने इनके बारे में कई अहम जानकारियां साझा की हैं। एसीबी इन जानकारियों की पुष्टि करने में जुटी हुई है, जिसके बाद पूछताछ के लिए सरकार से अनुमति मांगी जा सकती है।

वहीं, स्पेशल विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने हरियाणा पावर जेनरेशन कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) में डायरेक्टर फाइनेंस अमित दीवान को रिमांड खत्म होने के बाद जिला न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

एसीबी को रिमांड के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं। कुछ सरकारी अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं और कई अन्य विभागों के वित्त अधिकारी भी एसीबी के रडार पर हैं। इन अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

अमित दीवान ने गलत मंशा से खोले थे दो बैंक खाते

जांच एजेंसी के अनुसार, 18 मार्च 2026 को पुख्ता सबूतों के आधार पर अमित दीवान को गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया है कि आरोपित ने चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आइडीएफसी फर्स्ट बैंक में दो खाते खोले थे। आरोप है कि इन खातों को खोलने में सरकारी नियमों की जानबूझकर अनदेखी की गई और इसके पीछे गलत मंशा थी।

जांच एजेंसी का कहना है कि अमित दीवान ने मुख्य आरोपित रिभव ऋषि के साथ मिलीभगत कर घोटाले को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई और इसके बदले भारी अवैध धनराशि (घूस) भी स्वीकार की। यह तथ्य बरामद सामग्री और गवाहों के बयानों से भी पुष्ट हुए हैं।

जांच अहम मोड़ पर

पुलिस रिमांड के दौरान आरोपित से विस्तृत पूछताछ की गई, लेकिन जांच अभी भी अहम मोड़ पर है और कई पहलुओं की पड़ताल जारी है। एसआइटी के सदस्य और इंस्पेक्टर अरविंद के अनुसार, मामले में सरकारी फंड की बड़े स्तर पर हेराफेरी हुई है और आगे की जांच जारी है। जरूरत पड़ने पर अब तक गिरफ्तार आरोपितों को दोबारा पुलिस रिमांड पर भी लिया जा सकता है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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