होली के बाद बासौड़ा पर्व जिसे शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। बीते 3 दिनों से कुरूक्षेत्र में इस बासौड़ा पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नज़र आया। थानेसर के छोटा बाजार में स्थित शीतला माता मंदिर में बीते 3 दिनों से मेले का आयोजन किया गया। सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में शीतला माता की पूजा-अर्चना करने के लिए पहुँचते दिखाई दिए। आज शीतला नवमी के अवसर पर विशेष पूजा अर्चना और विशाल भंडारे के साथ ये मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। आज आयोजित कार्यक्रम में एस.डी. शिक्षण संस्थान के चेयरमैन विकास शर्मा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने शीतला माता के दरबार में माथा टेका, पूजा अर्चना की और अपने हाथों से भंडारे में सेवा भी की।
इस बार पर शीतला माता सेवा समिति के संरक्षक विजय रतन अग्रवाल, डॉक्टर पवन वशिष्ठ, प्रधान नरेंद्र वालिया, उपाध्यक्ष कुलदीप चोपड़ा, सचिव नरेश अरोड़ा टीनू, कोषाध्यक्ष विवेक धवन गोल्डी, कार्यकर्ता शीशपाल, बिन्दर, दीपक मेहरा, नरेंद्र कुमार, चेतन गर्ग, विजय मलिक, अंशुल व अन्य भक्तजन मौजूद रहे।
आपको बता दें कि बासौड़ा पर जहां शीतला माता को रात के बने बासी खाने जैसे मीठे चावल गुलगुले पूड़ी हलवा आदि का भोग लगाया जाता है। वहीं भोली माता की पूजा करने से सभी मनोकामना पूर्ण होती है तथा कष्ट रोग दूर होते हैं।
ऐसी मान्यता है कि बासौड़ा पर्व के दिन शीतला माता की पूजा से बीमारियों से मुक्ति मिलती है। बीते दिन शीतला माता मंदिर में रात बारह बजे से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मान्यता के अनुसार बासौड़ा पर्व पर रात को पकवान बनाया जाता है। इस पकवान से अगले दिन माता को प्रसाद चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि होली के बाद आग ठंडी करने एवं शरीर पर निकलने वाले छोटी माता, बड़ी माता के प्रकोप से बचाव के लिए शीतला माता की पूजा की जाती है। माता को प्रसन्न करने के लिए बासे पकवानों का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाता है जिससे प्रसन्न होकर शीतला माता अपने भक्तों के स्वास्थ्य की रक्षा करती हैं।
अगले दिन शीतला अष्टमी के अवसर पर मेले में दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने बुद्धो माता को मत्था टेका और ताजा बने खाने का भोग लगाया। जिस प्रकार होली के बाद पहले बासौड़ा पर्व मनाया जाता है उसी प्रकार बुधवार को बुद्धो माता का पूजन किया जाता है। घर में सुख समृद्धि की कामना के लिए बुद्धों माता पूजी जाती है। जिसमें सुबह से ही सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओ ने प्रसाद चढ़ाया और मन्नते मांगी। म बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और ताजा बने पकवान जैसे गुलगुले पूड़े, हलवा पूरी, मीठे चावल और रोटी आदि का भोग लगाया जाता है जिससे माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
आज शीतला नवमी के अवसर पर विशाल भंडारे के साथ 3 दिवसीय मेला संपन्न हो गया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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