बरसाती पानी की होगी निर्बाध निकासी, जल भराव की समस्या का होगा स्थाई समाधान।
करनाल 21 अगस्त, 
नगर निगम क्षेत्र में बरसाती पानी निकासी का स्थाई समाधान होगा। इसके लिए शहर में मौजूद 12 डिस्पोजल तथा 4 इंटरमिडिएट पम्पिंग स्टेशन (आई.पी.एस.) पर स्काडा सिस्टम लगाने की परियोजना तैयार की गई है। अगले करीब दो से तीन महीनों में इस पर काम शुरू होगा। यह जानकारी नगर निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) तैयार कर अनुमोदन के लिए निदेशालय शहरी स्थानीय निकाय को भेजी गई थी। इस पर कुछ जानकारी मांगी गई है, जिसकी अनुपालना पूरी करके शुक्रवार तक डी.पी.आर. को दोबारा निदेशालय भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना को मुकम्मल करने में अनुमानित 22 करोड़ 82 लाख रुपये की राशि खर्च होगी। इसमें 5 वर्ष का संचालन और रख-रखाव भी रहेगा।
इन डिस्पोजल व आई.पी.एस. पर लगेगा स्काडा- उन्होंने बताया कि स्काडा परियोजना में 12 डिस्पोजल व 4 आई.पी.एस. लिए गए हैं। डिस्पोजल में गुरू हरकिशन पब्लिक स्कूल सेक्टर-13 एक्सटेंशन, एच.एस.वी.पी. ऑफिस क्वाटर सेक्टर-13 एक्सटेंशन, कर्ण कॉमर्शियल सेंटर नजदीक बूथ न. 199, नजदीक पुरानी सब्जी मंडी ब्रिज सेक्टर-14, नजदीक कृष्णा मंदिर सेक्टर-14, सेक्टर-14 जी.टी. रोड नजदीक इंडियन ऑयल पेट्रोल पम्प, अटल पार्क सेक्टर-8, बलड़ी चौक नजदीक नया बस अड्डïा, गांव दहा, नजदीक रेलवे अंडर ब्रिज शिव कॉलोनी, सूरज नगर डिस्पोजल तथा 72 इंच डिस्पोजल एन.एच.-44 शामिल हैं। इसके अतिरिक्त गांव सैदपुरा, नजदीक हैरीटेज लॉन, मीरा घाटी तथा हकीकत नगर स्थित इंटरमिडिएट पम्पिंग स्टेशन लिए गए हैं।
परियोजना में लगेंगे यह उपकरण- उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत डिस्पोजल व आई.पी.एस. पर विभिन्न प्रकार के स्काडा उपकरण लगाए जाएंगे। इनमें रेन गेजिस, फ्लोमीटर, सोफ्ट स्टाटर, लेवल ट्रांसमीटर, लेवल सेंसर, राडार लेवल ट्रांसमीटर, इलैक्ट्रो-मेग्नेटिक फ्लोमीटर, प्रोसेस कंट्रोल पीएलसी, स्काडा ऑटोमेशन, वी.एफ.डी. ड्राईव्स तथा मोटर, पम्पिंग सेट, स्लूज वाल व स्लूज गेट को स्वत: नियंत्रित करने वाले उपकरण लगाए जाएंगे।
यह होगा फायदा- उन्होंने बताया कि बरसाती सीजन में डिस्पोजल पर लगे पम्प स्वचालित रूप से चलेंगे और स्मार्ट वर्क करेंगे। ज्यादा व कम बारिश होने की सूरत में नालों से कितना पानी आ रहा है, रेन गेजिस, फ्लोमीटर व राडार लेवल ट्रांसमीटर इसका पता लगाएंगे और उतनी ही क्षमता की पम्प मोटरें स्वचालित हो जाएंगी। पम्प खराब होने की स्थिति में स्टैण्ड बाय पर रखे पम्प को नियंत्रण कक्ष से ही चालू कर दिया जाएगा। डिस्पोजल व आई.पी.एस. का तमाम सिस्टम स्काडा के जरिए नियंत्रण कक्ष में लगी स्क्रीन पर नजर आएगा। तेज बारिश में भी सारा कार्य बिना किसी देरी के हो पाएगा। बरसाती पानी की निर्बाध रूप से निकासी होगी और शहर में जल भराव की समस्या का स्थाई समाधान होगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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