₹19 लाख से स्लिट लैंप बाय माइक्रोस्कोप मशीन स्थापित, जेब नहीं होगी ढीली 
कुरुक्षेत्र, 19 जुलाई। आमजन की आंखों की रोशनी अब और सुरक्षित रहेगी,क्योंकि श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय ने आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में एक और तकनीकी उपलब्धि जोड़ी है। अब मरीजों को आंखों की गहन जांच (मिबोग्राफी) के लिए निजी अस्पतालों में जेब ढीली नहीं करानी पड़ेगी। विश्वविद्यालय के शालाक्य तंत्र विभाग में लगभग 19 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक स्लिट लैंप बाय माइक्रोस्कोप मशीन स्थापित की गई है,जिससे आंखों की सूक्ष्मतम स्तर पर निशुल्क जांच होगी। आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान,कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान,अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो.राजेंद्र सिंह चौधरी, शालाक्य विभाग की चेयरपर्सन प्रो. आशु, प्रो. मनोज तंवर और डॉ.रुचिका ने शनिवार को मशीन का विधिवत शुभारंभ किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. धीमान ने कहा कि यह मशीन हमारे छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक वरदान साबित होगी। अब स्नातकोत्तर विद्यार्थी रोगियों की आंखों की सूक्ष्मतम स्तर पर जांच कर सकेंगे और उसकी रिकॉर्डिंग भी संभव होगी। इससे आयुर्वेद और आधुनिक तकनीक का समन्वय और मजबूत होगा। कहा कि विश्वविद्यालय आमजन को समर्पित भाव से आयुर्वेद की सशक्त और तकनीकी चिकित्सा पद्धति उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
कुलसचिव प्रो.ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि स्लिट लैंप बाय माइक्रोस्कोप जैसी उन्नत मशीन की स्थापना यह दर्शाती है कि हम केवल परंपरा में ही नहीं,तकनीकी प्रगति में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक दृष्टिकोण मिलेगा और रोगियों को वैज्ञानिक जांच की विश्वसनीय सुविधा भी उपलब्ध होगी।

जानिए क्या है स्लिट लैंप बाय माइक्रोस्कोप मशीन

विभाग के प्रो. मनोज तंवर ने बताया कि स्लीट लैप बाय माइक्रोस्कोप मशीन एक हाई-टेक डिवाइस है जो आंख की सतह से लेकर आंतरिक संरचना तक की सूक्ष्म जांच कर सकती है। इससे आंखों की पुतली,आंखों के पर्दे,पलकों के अंदर ग्रंथि की जांच और आंखों में सूखेपन जैसी समस्याओं की पहचान और निदान में अत्यधिक सहायता मिलती है। खास बात ये है कि हमारे यहां रोगियों की मिबोग्राफी जांच निशुल्क होगी, जोकि निजी अस्पताल में अच्छे दामों में होती है।

रोगियों को आयुर्वेद पद्धतियों से मिल रहा लाभ
विभाग की चेयरपर्सन प्रो.आशु ने बताया कि शालाक्य तंत्र विभाग में प्रतिदिन लगभग 40 से 50 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां एनसीटी मशीन द्वारा काला मोतिया और आंखों के प्रेशर की जांच,ऑटो-रेफ्रेक्टोमीटर मशीन से कंप्यूटराइज्ड आंखों की जांच,आयुर्वेद पद्धति से तर्पण,पुटपाक, सेक, आश्चयोतन,अंजन,स्वेदन, पिंडी और विडालक जैसी प्रक्रियाओं से रोगियों को उपचार का लाभ मिल रहा है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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