काम्यकेश्वर तीर्थ में श्रद्धालुओं ने लगाई श्रद्धा की डुबकी
विश्वशांति यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने डाली आहुतियां
काम्यकेश्वर तीर्थ पर शुक्ल पक्ष रविवारीय सप्तमी के दिन पूजन का विशेष महत्व : सत्यवान ब्रह्मचारी
कुरुक्षेत्र, 04 मई। कमोदा स्थित ऐतिहासिक काम्यकेश्वर तीर्थ में शुक्ल पक्ष की रविवारीय सप्तमी पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाई। तीर्थ में स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने दूध, दही, गंगाजल आदि चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की। तीर्थ पर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ब्राह्मणों ने विश्व शांति यज्ञ किया। यज्ञ के उपरांत भंडारे का आयोजन हुआ। उसमें साधु-महात्माओं और ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया।
शुक्ला सप्तमी के पावन अवसर पर  श्री जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष श्री ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज  के प्रतिनिधि के तौर पर सत्यवान ब्रह्मचारी ने श्री कामयकेश्वर महादेव मंदिर कमोदा में भ्रम महुर्त में शिव अभिषेक करके शुक्ला सप्तमी मेले व भंडारे का शुभारंभ किया। ब्लाक समिति के पूर्व चेयरमैन देवी दयाल शर्मा घराडसी, चौधरी जोगिंदर मास्टर, चौधरी वकील सिंह व रामपाल शर्मा  सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति डाली।
सत्यवान ब्रह्मचारी ने कहा कि महाभारत कालीन काम्यकेश्वर तीर्थ पर शुक्ल पक्ष रविवारीय सप्तमी के दिन पूजन का विशेष महत्व है। पुराण में वर्णित है कि शुक्ल पक्ष की रविवारीय सप्तमी के दिन स्नान करने के लिए पाडवों ने काफी लंबा इतजार किया फिर भी उनको इस दिन स्नान करने का सौभाग्य नहीं मिला। इस पवित्र सरोवर में स्नान करने से असाध्य रोगों से मुक्ति व संतान प्राप्ति होती है। मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, तालाब के नवीनीकरण से लेकर नया भवन बनाया जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में मंदिर की शोभा बढ़ेगी और श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा होगा। ग्रामीण सुमिंद्र शास्त्री, सुखदेव शर्मा, भगवत दयाल शर्मा ने बताया कि इस स्थान पर मात्र प्रवेश से ही मनुष्य मोक्ष की प्राप्ति कर पुण्य का भागी बनता है। वनवास के दौरान पाडव आठ वर्ष 11 मास तक इसी धरा पर रहे। उनके साथ 10 हजार के करीब शास्त्रोतियानिष्ठ ब्राह्मण रहते थे, जो नित्य प्रति भगवान शिव का अभिषेक व अनुष्ठान किया करते थे। नीतिवेता विदुर जी, वेदव्यास जी, मारकंडेय जी एवं लोमहर्षण ऋषि जी नित्यप्रति महापुरुषों के जीवन का वृतात इसी धरा पर बताते थे।  पाडवों के वंशज अपने पितरों की मुक्ति एवं मनोकामना के लिए शुक्ल सप्तमी का इंतजार करते रहे। रविवार को तीर्थ के पवित्र सरोवर पर सुबह श्रद्धालुओं ने स्नान किया और शिवलिंग पर अभिषेक किया। मंदिर में विश्व शांति यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाली। मंदिर परिसर में कई दुकानें भी लगी, जिस पर लोगों ने खरीदारी की। इस मौके  पूर्व सरपंच देवीचंद शर्मा, सुदर्शन शर्मा, लाल चंद, शिव चरण फौजी, चौधरी मलकीत सिंह, गंगाराम शर्मा, शीशपाल शर्मा, पवन कुमार शर्मा, प्रवीण शर्मा, मोहनलाल , मुकेश शर्मा,सुच्चा सरपंच, प्रवीन फौजी, सुरजीत, चौधरी गुरदीप ,चौधरी रिंकू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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