हमारी चिकित्सा पद्धति प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित : प्रो. करतार सिंह धीमान
पर्यावरण के प्रति संरक्षण की मूल अवधारणा को आत्मसात करने की जरूरत : डॉ. ऋषि गोयल
केयू डॉ. भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र व केडीबी के सहयोग से ‘वर्तमान वैश्विक पर्यावरण असंतुलन व श्रीमद्भगवद् गीता की प्रासंगिकता’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित
कुरुक्षेत्र, 6 दिसम्बर। 
श्रीमद्भगवद्गीता ने पूरे विश्व को शांति का संदेश दिया है। ऐसा ग्रंथ केवल भारत के पास है जो मानवता के कल्याण का रास्ता दिखाता है। वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान गीता का संदेश हम सभी के समक्ष दिखाया दिया। भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों ने हमें बचाया। यह विचार हरियाणा के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती ने केयू के डॉ. भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र व केडीबी के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को सीनेट हॉल में ‘वर्तमान वैश्विक पर्यावरण असंतुलन व श्रीमद्भगवद् गीता की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती सम्मेलन के विशेष सत्र में बतौर विशिष्ट अतिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर स्थित भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप के पीछे भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा हरियाणा पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल का विजन था। उन्होंने बताया कि जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2014 में कुरुक्षेत्र में आए थे तब उन्होंने कहा था कि महाभारत काल में कृष्ण के बड़े भाई बलराम गुजरात से सरस्वती के किनारे चलकर भगवान कृष्ण से मिलने कुरुक्षेत्र आए थे। उन्होंने कहा कि गीता दर्शन भारतीय समाज की समरूपता को प्रदर्शित करती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय यज्ञ एवं अनुष्ठानों में भी सभी के कल्याण की बात की जाती है तथा यही भारतीय ज्ञान परम्परा का भी संदेश है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में मेरिट के आधार पर नौकरियां गीता के निष्पक्षता के संदेश को अंकित करती है। इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
विशिष्ट अतिथि आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करतार सिंह धीमान ने कहा कि पर्यावरण के साथ ही मनुष्य का स्वास्थ्य जुड़ा हुआ है। हमारी चिकित्सा पद्धति प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। हमें युक्ति पूर्वक आहार और विहार करना चाहिए। गीता के अनुसार पर्यावरण के लिए यदि हम कुछ कर रहे है तो वो भगवान के लिए कर रहे हैं।
मुख्य वक्ता एसआईएसटीई के निदेशक डॉ. ऋषि गोयल ने कहा कि गीता में निहित संदेश को ग्रहण कर मानव को पर्यावरण के प्रति संरक्षण की मूल अवधारणा को आत्मसात करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य द्वारा प्रकृति के अत्यधिक दोहन के कारण पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है जिससे हजारों ग्लेशियर पिघल रहे हैं तथा वन्य एवं जीव जंतुओं की प्रजातियों पर जीवन का संकट आ रहा है।  गीता वास्तव में सिखाती है कि सम्पूर्ण भौतिक जगत, पर्यावरण व सम्पूर्ण प्रकृति केवल भौतिक अस्तित्व नहीं है इसका आधार आध्यात्मिक है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ग्रीन मैन ऑफ हरियाणा प्रो. एसएल सैनी ने कहा कि गीता सबसे पवित्र ग्रंथ है। गीता का सार उपदेश उसके श्लोक कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन में है। इसका अर्थ बहुत गहरा है जो मुझे बाबा नानक की वाणी में मिला।
दिल्ली से आए लेखक अविनाश कुमार ने कहा कि गीता का ज्ञान सभी तक पंहुचना आवश्यक है। प्रकृति के चक्र को तोड़ने से ही पर्यावरणीय असंतुलन पैदा होता है। अतः हमें प्रकृति के संरक्षण के लिए त्यागपूर्ण कार्य करने की जरूरत है।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर अध्ययन केन्द्र के निदेशक एवं सत्र के आयोजनकर्ता डॉ. प्रीतम सिंह ने सभी अतिथियों का परिचय करवाते हुए विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की। अंत में आयोजन सचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन में मंच का संचालन उपासना ने किया।
इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार भारत भूषण भारती, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. करतार सिंह धीमान, केडीबी के मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल, प्रशांत भारद्वाज, रेणु गोयल, डॉ. वीरेन्द्र पाल, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. प्रवेश, डॉ. धर्मवीर, डॉ. दिविज गुगनानी सहित शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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