बोले : लगातार मिसाइल के प्रयोग से बढ़ रहा प्रदूषण
कहा: जंगलों का पुनः निर्माण ना हुआ तो विनाश निश्चित
करनाल 22 नवंबर : महाकाल भैरव अखाड़ा के प्रमुख कैलाशपुरी महाराज जी ने पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण को खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि भारत सरकार और देश के वैज्ञानिक अब भी नहीं चेते तो पूरे देश को आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने देश की मीडिया से भी आग्रह किया है कि वह देश हित में ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे को जोर-जोर से उठाकर सरकार के कानों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से, वाहनों के धुएं से या उद्योगों से पर्यावरण नहीं बिगड़ रहा। बल्कि ग्लोबल वार्मिंग का असर दूसरे कारणों से हो रहा है। उन्होंने दावा किया की लाखों वर्ष आयु वाले पर्वत पहाड़ों को काटकर उसका सीमेंट बनाना बड़ा कारण है। कंक्रीट के मकान की मियाद 50 से 100 साल है और पर्वत की आयु को घटाना सीधे प्राकृतिक से छेड़छाड़ है। उन्होंने कहा कि विश्व भर के जंगलों में यदा-कदा आग लगाती रहती है जिससे जंगल नष्ट हो रहे हैं। मगर जंगलों का पुनर्निर्माण तो नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि इसराइल और गाजा के बीच लगातार युद्ध जारी है। रूस यूक्रेन के युद्ध को 1000 से भी अधिक दिन हो गए हैं। मगर इसे रोकने के प्रयास करना तो दूर उल्टा अमेरिकी राष्ट्रपति  ने यूक्रेन को रूस के भीतर मिसाइल छोड़ने की हामी भर पूरे विश्व को संकट में डाल दिया है। इधर रूस ने बिना परमाणु के मिसाइल छोड़कर चेतावनी भी दे दी है कि वह एटमी हमला कर सकता है। ऐसे में लगातार मिसाइल के प्रयोग से ग्लोबल वार्मिंग का पूरा संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक एक तो अंतरिक्ष में कचरा फैला रहे हैं और दूसरा चांद से भी छेड़छाड़ कर रहे हैं जो भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान है। विश्व भर के अधिकांश मुल्क एटमी और मिसाइल का परीक्षण कर रहे हैं वह भी धरती और समंदर पर। महाकाल स्वामी कैलाशपुरी महाराज ने कहा कि लगातार प्राकृतिक से छेड़छाड़ करने की कीमत पूरे विश्व को चुकानी होगी। उन्होंने वैज्ञानिकों और सरकार से सवाल पूछा कि लाखों वर्ष आयु वाले पर्वतों को काटकर उसका सीमेंट बनाकर उसे सो या 150 वर्षों में परिवर्तित करना विज्ञान है या अज्ञान ? पहले देश के वैज्ञानिक इसका खुलासा करें। उन्होंने कहा कि अभी भी समय है की सभी देश मिलकर लगातार चल रहे युद्धों को रोकने के लिए एक मंच पर आए वरना पूरे विश्व की तबाही संभव है। उन्होंने कहा कि विश्व भर के ग्लेशियर पिघल रहे हैं। दुबई और राजस्थान जैसे शहरों में बाढ़ आ रही है। यह प्राकृतिक आपको  संकेत दे रही है। सुनामी, चक्रवात ,बाढ़, भू संखलन, ज्वालामुखी पर्वत का फटना, भूकंप और जलजला लगातार दस्तक दे रहे हैं मगर कोई भी देश गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के कारण भारत में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अब सरकार स्कूलों को बंद कर रही है। देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के हालात सबसे खराब है। वहां लोग जहरीली हवा का सांस ले रहे हैं। जिससे गंभीर बीमारियां होंगी और लोग अकाल मृत्यु का कारण बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि परीक्षण, कटाव, खनन, युद्ध और लगातार प्राकृतिक से छेड़छाड़ विनाश का कारण बन जाएगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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