पुलिस शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि

लेखक- डॉ. अशोक कुमार वर्मा

भारत में हर वर्ष 21 अक्टूबर का दिन पुलिस स्मृति दिवस अर्थात पुलिस शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की परम्परा के पीछे भी एक घटना है जिसके पश्चात पूरे भारत में 21 अक्टूबर को एक साथ एक ही समय पर केंद्र एवं राज्य पुलिस बल द्वारा उन कर्तव्य पथ पर न्यौछावर अर्थात बलिदान होने वाले पुलिस कर्मियों का स्मरण किया जाता है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। यह घटना 1959 की है जब चीनी आक्रमण में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के 10 अधिकारी अपने प्राण गवां चुके थे। 20 अक्टूबर 1959 के दिन लद्दाख के अक्साई चिन में हॉट स्प्रिंग में समुद्र तल से 15,000 फीट ऊपर स्थित भारत-तिब्बत सीमा पर अत्यधिक तनाव के कारण, भारत की तीसरी बटालियन की तीन अलग-अलग इकाइयों को भारतीय पुलिस द्वारा संचालित किया गया था। उस समय सीमा पर नियुक्त केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के जवान चीनी हमले से भारत-तिब्बत सीमा की सुरक्षा और निगरानी कर रहे थे। 21 अक्टूबर 1959 को, तीन इकाइयों में से 2 इकाइयाँ वापस लौट आईं। लापता इकाइयों (पोर्टर और 2 पुलिस कांस्टेबल) की तलाश में, सीआरपीएफ ने एक नई इकाई को लापता पुलिस कर्मियों को खोजने का काम सौंपा।
जब केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल एक छोटी पहाड़ी पर पहुंची, तो उन्होंने दूसरी ओर से गोलीबारी देखी। उसमें 10 केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के अधिकारी कर्तव्य निर्वहन करते हुए मारे गए थे। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल अधिकारियों के शव एक महीने के पश्चात भारतीय पुलिस बल को वापस कर दिए गए। तब से पुलिस बल के बलिदान का सम्मान करने के लिए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों/ महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
पुलिस स्मृति दिवस के अंतर्गत भारत के लगभग सभी पुलिस मुख्यालय में स्मरण दिवस परेड आयोजित की जाती है। शस्त्र उल्टे (शोक शस्त्र) होते हैं वे वेदना को दर्शाते हैं। इसके साथ में पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्य के दौरान शहीद हुए केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल अधिकारीयों की दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देने और सम्मान देने के लिए दो मिनट का मौन रखते हैं। पुलिस अधिकारी शहीदों के सम्मान में तीन-वॉली शॉट भी फायर करते हैं।
यह श्रद्धांजलि सभी मुख्यालयों पर एक साथ एक ही समय पर की जाती है जिसमें उन सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम से स्मरण किया जाता है जो अलग अलग समय पर अलग अलग घटनाओं में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए बलिदान अर्थात न्यौछावर हुए हैं। इतना ही नहीं बलिदान होने वाले अधिकारी अथवा कर्मचारी के परिवार से पत्नी अथवा माता पिता को भी अलग से हर वर्ष सम्मानित किया जाता है।
पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए बलिदान को चिरस्मरणीय बनाने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा व एकता बनाए रखने में पुलिस की उत्कृष्ट भूमिका का सम्मान करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पुलिस स्मृति दिवस, 2018 के अवसर पर चाणक्यपुरी, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक (National Police Memorial) देश को समर्पित किया था। यह स्मारक पुलिस बलों में राष्ट्रीय पहचान, गर्व, उद्देश्यों में एकरूपता, एक समान इतिहास और भविष्य की भावना भरने के साथ-साथ उनकी इस प्रतिबद्धता को भी और सुदृढ़ करता है कि उन्हें अपने प्राणों के मूल्य पर भी देश की रक्षा करनी है। पुलिस स्मारक में एक केंद्रीय शिल्पकृति के अतिरिक्त  ‘शौर्य की दीवार’ तथा एक संग्रहालय भी है। केंद्रीय शिल्पकृति के रूप में उपस्थित एक 30 फुट ऊँचा ग्रेनाइट का एकल पाषाण खंड पुलिस कर्मियों की शक्ति, विनम्रता और नि:स्वार्थ सेवा का प्रतीक है। इसी प्रकार ’शौर्य की दीवार’ जिस पर शहीदों के नाम उत्कीर्ण हैं, कर्तव्य  के पथ पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले पुलिसकर्मियों की बहादुरी और बलिदान के अचल प्रतीक के रूप में उपस्थित है।
पुलिस स्मृति दिवस के पश्चात् 22 से 30 अक्तूबर के बीच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अथवा केंद्रीय पुलिस संगठनों द्वारा राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर विभिन्न स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें शहीदों के परिजनों को स्मारक पर आमंत्रित करना, पुलिस बैंड डिस्प्ले, मोटरसाइकिल रैली, शहीदों के निमित्त दौड़ आदि का आयोजन करने के साथ-साथ पुलिस बल कर्मियों के बलिदान, शौर्य तथा सेवा को दर्शाने वाली फिल्में भी दिखाई जाती है। इस अवधि के अंतर्गत सभी पुलिस बलों अर्थात केंद्र और राज्य पुलिस बलों द्वारा देश भर में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम भी सम्मिलित किये जाते हैं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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