चुनाव के दौरान, अन्य राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की आलोचना केवल उनकी नीतियों, कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड और कार्यों तक ही होनी चाहिए सीमित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी चुनाव अधिकारियों का करें सहयोग

कुरुक्षेत्र 5 अप्रैल जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त शांतनु शर्मा ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा आम चुनाव -2024 लड़ने वाले उम्मीदवारों व राजनीतिक दलों के लिए चुनाव के दौरान क्या करना है और क्या नहीं (डूज एंड डॉन्ट) के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों का चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक अनुपालन किया जाना आवश्यक है।
उपायुक्त शांतनु शर्मा ने कहा कि सभी दलों और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को सार्वजनिक स्थानों जैसे कि मैदान और हेलीपैड निष्पक्ष रूप से उपलब्ध होना चाहिए। चुनाव के दौरान, अन्य राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की आलोचना केवल उनकी नीतियों, कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड और कार्यों तक ही सीमित रहनी चाहिए। इसके अलावा, शांतिपूर्ण और अविवेकपूर्ण घरेलू जीवन के लिए प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार की पूरी तरह से रक्षा की जानी चाहिए। स्थानीय पुलिस अधिकारियों को पूरी तरह से सूचित किया जाना चाहिए और प्रस्तावित बैठक के समय व स्थान की आवश्यक अनुमति समय रहते सही तरीके से ली जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बैठक के स्थान पर यदि कोई प्रतिबंधात्मक या निषेधात्मक आदेश लागू है तो उन आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी प्रकार, प्रस्तावित बैठकों के लिए लाउडस्पीकर या ऐसी किसी अन्य सुविधा के उपयोग के लिए अनुमति प्राप्त की जानी चाहिए और बैठकों में गड़बड़ी या अव्यवस्था पैदा करने वाले व्यक्तियों से निपटने में पुलिस सहायता प्राप्त की जानी चाहिए। किसी भी जुलूस को शुरू करने और समाप्त करने के समय व स्थान तथा मार्ग को अग्रिम रूप से फाइनल किया जाना चाहिए और पुलिस अधिकारियों से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी चाहिए। जुलूस का मार्ग यातायात को बाधित नहीं करना चाहिए। शांतिपूर्ण और व्यवस्थित मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी चुनाव अधिकारियों को सहयोग किया जाना चाहिए। साथ ही, चुनाव में लगे सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बैज या पहचान पत्र दिखाना होगा।
उन्होंने कहा कि मतदाताओं को जारी अनौपचारिक पहचान पर्ची सादे (सफेद) कागज पर होनी चाहिए और जिस पर पार्टी का कोई नाम और निशान या उम्मीदवार का नाम नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, प्रचार अभियान की अवधि के दौरान और मतदान के दिन वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए। चुनाव के संचालन के संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या को निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक, रिटर्निंग अधिकारी, जोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेट, मुख्य निर्वाचन अधिकारी या भारत निर्वाचन आयोग के संज्ञान में लाया जाना चाहिए। चुनाव के विभिन्न पहलुओं से संबंधित सभी मामलों में निर्वाचन आयोग या रिटर्निंग ऑफिसर या जिला निर्वाचन अधिकारी के आदेश या दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन किया जाना चाहिए। चुनाव प्रचार अवधि के समाप्त होने के उपरांत, यदि कोई व्यक्ति मतदाता या चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार या उम्मीदवार का चुनाव एजेंट नहीं है तो उस व्यक्ति को संबंधित निर्वाचन क्षेत्र को छोड़ना होगा।
चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को किसी भी आधिकारिक काम को चुनाव प्रचार या चुनावी गतिविधियों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए और वित्तीय या अन्य किसी प्रकार का कोई प्रलोभन मतदाता को नहीं दिया जाना चाहिए। मतदाताओं की जाति या सांप्रदायिक भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जानी चाहिए और न ही कोई ऐसी गतिविधि जो मौजूदा मतभेदों को बढ़ा सकती है या विभिन्न जातियों, समुदायों, धार्मिक और भाषाई समूहों के बीच आपसी द्वेष पैदा करती हो या तनाव पैदा करती हो, ऐसी कोई गतिविधि नहीं की जानी चाहिए। चुनाव की पवित्रता व पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों को यह सलाह दी जाती है कि वे नकद लेन-देन से बचें और अपने उम्मीदवारों, एजेंट, कर्मियों और पदाधिकारियों को निर्देश दें कि चुनाव के दौरान वे बड़ी मात्रा में नगद राशि अपने साथ न रखें। इसके अलावा, अन्य राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों द्वारा आयोजित सार्वजनिक बैठकों या जुलूसों में बाधा नहीं डालनी चाहिए। अन्य राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा लगाए गए पोस्टरों को हटाना या विकृत नहीं किया जाना चाहिए। वाहनों पर रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक लाउडस्पीकरों का उपयोग नहीं होना चाहिए।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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