हरियाणा, हिमाचल और पंजाब के कलाकारों ने मोहा दर्शकों का मन, दिखाई सांस्कृतिक झलक
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लोहड़ी उत्सव में तीन राज्यों के कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा, दर्शको ने सराहा
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कुरुक्षेत्र 13 जनवरी। लोक कलाकार सदैव अपनी प्रतिभा तथा हुनर से अपने प्रदेश की संस्कृति का परिचय देते हैं। लोक संस्कृति ही किसी भी प्रदेश को महान् बनाती है। लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जानी वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां न केवल उनके प्रदेश की सभ्यता व संस्कृति का बखान करती है, बल्कि उस प्रदेश के सामाजिक परिवेश का भी दर्शन कराती हैं। ये कहना था विद्या भारती संस्कृति शिक्षण संस्थान कुरुक्षेत्र के निदेशक डा. रामेंद्र सिंह का। मौका था कला कीर्ति भवन में हरियाणा कला परिषद् अम्बाला मण्डल द्वारा आयोजित लोहड़ी उत्सव का। इस अवसर पर हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने अपने प्रदेश के लोक रंग प्रस्तुत किये। कार्यक्रम में डा. रामेंद्र सिंह बतौर मुख्यअतिथि पहुंचे। कार्यक्रम से पूर्व हरियाणा कला परिषद अम्बाला मण्डल के अतिरिक्त निदेशक नागेंद्र शर्मा ने मुख्यअतिथि को पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। लोहड़ी उत्सव का आगाज मुख्यअतिथि डा0 रामेंद्र सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी बृज शर्मा, अतिरिक्त निदेशक नागेंद्र शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन हरियाणा कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में पहली प्रस्तुति हरियाणा प्रदेश की महिला कलाकारों की रही, जिसमें आरती एवं साथी कलाकारों ने भगवान कृष्ण को समर्पित गीत गोकुल में ना जाईयो श्याम मईया की मान ले पर नृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसक बाद संजीव एंटरटेनमेंट ग्रुप के कलाकारों ने पंजाबी प्रस्तुति अरदास का प्रस्तुतिकरण किया। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर से आए देवशर्मा की टीम ने सिरमौरी नाटी प्रस्तुत कर लोगों को हिमाचली संस्कृति से रुबरु करवाया। इसके साथ ही हरियाणवी वेशभूषा में सजे हरियाणा के छोरे जब हरियाणवी नृत्य के लिए मंच पर पहुंचे तो दर्शकों ने गर्मजोशी के साथ कलाकारों का स्वागत किया। भारत के कोने-कोने में धूम मची हरियाणे की गीत पर थिरकते हुए हरियाणवी छोरे कार्यक्रम में चार चांद लगाते नजर आए। इसके अलावा पंजाब के कलाकारों ने पंजाबी नृत्य से लोगों का मन मोहा। वहीं हरियाणवी नृत्य चमेली का फूल में आरती, अनु, यशिका, तान्या और प्रभनूर ने बेहतरीन प्रस्तुति से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। जहां एक ओर हरियाणवी और पंजाबी नृत्यों की धूम रही, वहीं हिमाचल प्रदेश के पडुआ नृत्य ने पंजाब के गिद्दे की याद दिलाई। महिलाओं द्वारा किया गया नृत्य अपनी अनूठी छाप छोड़ने में कामयाब रहा। अंतिम प्रस्तुति पंजाब के भंगड़ा की रही, जिसमें एक से बढ़कर एक करतब दिखाते हुए पंजाब के गबरु जवान अपने नृत्य से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर रहे थे। कार्यक्रम उपरांत भरतमुनि रंगशाला के बाहर मुख्यअतिथि डा. रामेंद्र सिंह ने कलाकारों एवं दर्शकों के साथ मिलकर लोहड़ी जलाकर लोहड़ी उत्सव को मनाया। सुंदर मुंदरिये तेरा कोन वचारा आदि लोकगीतों के साथ एक तरफ जहां कलाकार ढोल की थाप पर थिरक रहे थे वहीं दूसरी तरफ सर्द हवाओं के बीच जलती लोहड़ी की गरमाहट लोगों को रोमांचित कर रही थी। हरियाणा कला परिषद अम्बाला मण्डल के अतिरिक्त निदेशक नागेंद्र शर्मा सहित कला परिषद के कर्मचारियों व सभी दर्शकों ने नाचते हुए अपनी खुशी व्यक्त की। इस अवसर पर भारी संख्या में स्थानीय लोगों ने लोहड़ी उत्सव को सफल बनाने में अपना सहयोग दिया। अंत में मुख्यअतिथि ने सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। वहीं नागेंद्र शर्मा ने मुख्यअतिथि को स्मृति चिन्ह देकर आभार व्यक्त किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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