विवि के अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों का रोजगार पॉलिसी या विशेष कैडर बनाकर सुरक्षित करे सरकार : हुकटा
डॉ. राजेश वधवा
कुरुक्षेत्र। हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्टचुअल टीचर्स संघ, हरियाणा (हुकटा) ने राज्य सरकार से मांग की कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कार्यरत अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए सरकार पॉलिसी या विशेष कैडर बनाकर   उनका रोजगार सुरक्षित करें। ये अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर रिक्त पदों पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। अब स्थायी भर्ती की प्रक्रिया से उन पर छंटनी की तलवार लटक गई है।संघ सभी पार्टियों के सांसदों, विधायकों व अन्य मंत्रिमंडल के नेताओं को रोजगार सुरक्षित करवाने की पॉलिसी बनाने के लिए पत्राचार और मिलकर रोजगार सुरक्षित करने की मांग लंबे समय से कर संघर्ष कर रहा है। इसी क्रम में संघ के प्रतिनिधिमण्डल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नायब सिंह सैनी से मिलकर मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया।
 संगठन प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार मलिक ने कहा कि हाल ही मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि हरियाणा के सरकारी विद्यालयों के अतिथि अध्यापकों की तरह नीति या विशेष कैडर बना कर हम सबका रोजगार सुरक्षित करने पर काम कर रहे हैं।
साथ में संघ के महासचिव व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इकाई के अजय इंदौरा ने यह भी अपील की कि भर्ती करते समय अस्थाई रूप से पहले से कार्यरत 1013 असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों को भरा हुआ मानकर या छोड़कर शेष क्लीयर कट वैकेंसी पर भर्ती की जाए ताकि सबका रोजगार सुरक्षित हो सकें।
हुकटा के प्रदेश प्रेस सचिव अभिनव कटारिया ने बताया कि प्रदेश के 15 सरकारी विश्वविद्यालयों में एक हजार से अधिक अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर कई वर्षों से वर्कलोड पर कार्यरत हैं। सभी की नियुक्ति यूजीसी के मापदंडों जैसे यूजीसी नेट, पीएचडी की योग्यता पूर्ण कर नियमानुसार की गई है। सभी प्रारंभिक वेतनमान पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।अब स्थायी भर्ती की जाएगी तो उनकी छंटनी हो जाएगी,जिससे उनका  व उनसे संबंधित 10 से 15 हजार सदस्यों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। काफी अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर ऐसे हैं उनकी आवदेन के लिए आयु पूरी चुकी है या उसके आस-पास पहुंच चुकी है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इकाई का नेतृत्व कर रही स्वेता कश्यप ने कहा कि नयी भर्ती की पोस्टों पर कैटेगरी व अन्य कारणों के कारण पहले से कार्यरत अस्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर अपने विभाग/कॉलेज में आवेदन ही नहीं कर सकेंगे और ग्रॉस सैलरी न मिलने के कारण अनुभव का लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं जिसके कारण हर समय बेरोजगारी की तलवार हम सबके सिर पर लटकती रहती है। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर से डॉ श्वेता कश्यप डॉ सुरेंदर शर्मा, डॉ दीपक शर्मा, राहुल गर्ग, डॉ पुरषोत्तम कुमार, डॉ ज्ञान सागर  व अन्य साथी उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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