राह संस्था ने स्वतंत्रता सेनानी साधुराम की पुत्री विनोद बाला को किया सम्मानित
स्वतंत्रता सेनानी साधुराम की एक जनवरी 2024 की जयंती पर राह संस्था ने वितरित किए पौधे
अम्बाला। राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन व केश कला एवं कौशल विकास बोर्ड के निदेशक नरेश सेलपाड़ ने  कहा है कि साधुराम जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के कारण ही हमारा देश भारत आजाद हुआ और हम सब आज एक आजाद देश के नागरिक बन पाए हैं। वो महान स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त की बम दस्ता टीम के सदस्य रहे स्वतंत्रता सेनानी साधुराम की जयंती अवसर पर अंबाला के गांव जण्डली में आयोजित पौध वितरित कार्यक्रम के तहत उनकी 65 वर्षीय बेटी विनोद बाला को सम्मानित कर रहे थे। इससे पहले विनोद बाला को राह संस्था की तरफ से शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। इस दौरान इस दौरान राह संस्था की टीचर्स ट्रेनिंग विंग के नेशनल प्रभारी प्रवीन पटपटिया, कोच शम्मी राजपूत सहित राह संस्था से जुड़े पदाधिकारी व सदस्यगण मौजूद रहे। इस दौरान राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन नरेश सेलपाड़ ने कहा कि यह हमारी संस्था के लिए बहुत ही गर्व का बात है कि उन्हें ऐसे महान साधुराम के परिवार को सम्मानित करने अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी साधुराम व इस परिवार के त्याग व बलिदान को सदियों तक याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जालंधर जिले के काहमा गांव में गेंदा राम के घर में 1 जनवरी 1925 को जन्मे स्वतंत्रता सेनानी साधुराम बचपन से देश को आजाद करवाने के सपने देखते थे। अमर शहीद भगत सिंह, दुर्गा भाभी व आजाद सिंह जैसे क्रांतिकारियों को अपना आदर्श मानने वाले स्वतंत्रता सेनानी साधुराम ने महज 14 वर्ष की आयु में ही अपनी पढ़ाई छोड़ कर क्रांतिकारियों के लिए बम बनाना सीख लिया था। वर्ष 1940 में अंत में बम बनाते समय एक बम उनके हाथ में ही फट गया था। जिसमें उनका एक हाथ पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके चलते उन्हें मजबूरन बम बनाने के दस्ते से दूरी बनानी पड़ी। मगर उन्होंने अपनी आजादी की लड़ाई जारी रखी। राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन नरेश सेलपाड़ के अनुसार स्वतंत्रता सेनानी साधुराम सत्याग्रह आंदोलन व भारत छोड़ो आंदोलनों का हिस्सा बने रहे। इसी कड़ी में 10 फरवरी 1941 को सरकार विरोधी भाषण देने की सजा के तौर पर उन्हें गिरफ्तार किया और 1 साल तक जेल में रखा गया। इसी प्रकार वर्ष 1942 में 5 जून और 15 अगस्त को फिर से गिरफ्तार किया। इस दौरान वो स्वतंत्रता सेनानी लाला बलवंत राय तायल व अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ वो सेंट्रल जेल लाहौर व मुल्तान सहित देश की अलग-अलग जेलों में करीब छह वर्ष तक बंद रहे। आजादी के इस नायक को तीन ताम्र पत्रों व कई अवार्डों से समय-समय पर संयुक्त पंजाब व हरियाणा सरकारों द्वारा नवाजा गया।
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अम्बाला से रहा है गहरा नाता:-
सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन के टीचर्स ट्रेनिंग विंग के नेशनल प्रभारी प्रवीण पटपटिया ने कहा कि अनुसार आजादी के बाद अम्बाला की मुख्य आर्मी केंटिन के संचालन की जिम्मेवारी स्वतंत्रता सेनानी साधुराम को ही मिली थी। वो यहां लंबे समय तक रहे थे। उनकी बेटी विनोद बाला आज भी गांव जण्डली गांव में रहती हैं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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