लुप्त हो रही संस्कृति को संरक्षित कर रहा है अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव
हरियाणवी लोक कला ढेरु गाथा गायन को जींवत रखने काम कर रहे लोक कलाकार, ब्रहमसरोवर के तट पर ढेरु गाथा गायन ने बांधा समां, शिल्प और सरस मेले के सातवें दिन पर्यटकों ने जमकर की खरीदारी, सेल्फी लेने का युवाओं में बढ़ा क्रेज, ढेरु गाथा ग्रुप के कलाकार जमा रहे है ब्रहमसरोवर पर लोक संस्कृति का रंग
कुरुक्षेत्र 13 दिसंबर हरियाणा की लोक कला और संस्कृति की लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी कई विधाओं को संरक्षित करने का काम अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव कर रहा है। इस महोत्सव में ढेरु गायन गाथा, बाजीगर कला और कच्ची घोड़ी जैसी लोक कलाओं को ब्रहमसरोवर के पावन तट पर देखा जा रहा है। इस महोत्सव से न केवल लोक संस्कृति को जींवत रखने का प्रयास सरकार की तरफ से किया जा रहा है बल्कि लोक कलाकारों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करवाएं जा रहे है। अहम पहलू यह है कि ब्रहमसरोवर के तट पर ढेरु गाथा गायन ग्रुप के कलाकार हरियाणवी संस्कृति का रंग जमा रहे है।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केन्द्र पटियाला, हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा कला परिषद और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के साथ-साथ राज्य सरकार की तरफ से हरियाणा ही नहीं विभिन्न प्रदेशों की लोक संस्कृति को संरक्षित करने और कलाकारों को एक मंच मुहैया करवाने का काम अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के जरिए किया जा रहा है। इस महोत्सव में विभिन्न प्रदेशों की लोक कला को पर्यटकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। इन प्रदेशों के उन लोक नृत्यों को कलाकार प्रस्तुत कर रहे है, जो लोक कला लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। लोक कलाकार ने बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया कि हरियाणा प्रदेश में कुछ ही कलाकार ही बचे है जो बीन, तुंबा, ढोलक, खंजरी बजा कर जोगी नाथ बीन सपेरा परम्परा को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।
उन्होंने कहा कि उनके ग्रुप में उनके अन्य साथी कलाकार भी उनके साथ इस कला को जीविंत रखने का काम कर रहे है। सभी कलाकार पारम्पकि वेशभूषा से सुसज्जित होकर बीन, तुम्बा, ढोलक, खंजरी बजाकर लोगों का मनोरंजन कर रहे है। यह महोत्सव लोक कलाकारों का एक बड़ा मंच बन चुका है। सरकार द्वारा इस प्रकार के कलाकारों को ओर अधिक प्रोत्साहित करने के लिए अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव जैसे मंच उपलब्ध करवाने चाहिए। महोत्सव के शिल्प और सरस मेले के सातवें दिन हरियाणा के विभिन्न गांवों के लोक कलाकारों ने ब्रहमसरोवर के उत्तरी तट पर ढेरु गाथा गायन की प्रस्तुती देकर पर्यटकों को झुमने पर मजबुर कर दिया। इन लोक कलाकारों ने ढेरु गाथा गायन के जरिए गुरु गोरख नाथ जी की गाथा, जवाहर गूगा पीर की गाथाओं का गुणगान किया। इन लोक कलाकारों का कहना है कि यह लोक कला विलुप्त करने के कगार पर पहुंच चुकी है। सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव से लोक कलाओं को जींवत रखने का प्रयास किया जा रहा है।
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महोत्सव के सरस और शिल्प मेले में पर्यटकों ने खुब की खरीददारी
अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव के शिल्प और सरस मेले में पर्यटकों ने बुधवार को जमकर खरीददारी की है। एक तरफ जहां पर्यटक ब्रहमसरोवर के तट पर खिली धुप में विभिन्न प्रदेशों के व्यंजनों का स्वाद चख रहे थे, वहीं अलग-अलग स्टॉलों पर जाकर खरीददारी भी कर रहे थे। इतना ही नहीं युवा वर्ग मेले में सेल्फी लेकर अपने आपको आनंदित महसुस कर रहे है।
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बिछड़ों को मिलाने का काम कर रहा हैं सूचना केन्द्र
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2023 में ब्रहमसरोवर के मुख्य द्वार पर जिला सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग की तरफ से सूचना केन्द्र स्थापित किया गया हैं। इस सूचना केन्द्र के माध्यम से बिछड़ों को मिलाने का काम कर रहा हैं। डीआईपीआरओ डा. नरेन्द्र सिंह ने बताया कि इस सूचना केन्द्र से पल-पल की सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ-साथ महोत्सव में आने वाले पर्यटकों को पल-पल की जानकारी दी जा रही है। इस सूचना केन्द्र पर विजय कुमार, बरखा राम, कृष्ण लाल, मनोज कुमार, राजकुमार शर्मा, पवन कुमार सहित अन्य कर्मचारी महोत्सव में आने वाले पर्यटकों को विभिन्न सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे है।

विभिन्न प्रदेशों की शिल्प कला और कारागिरी ने महोत्सव की फिजा में भरा रंग
कुरुक्षेत्र 13 दिसंबर …जब शिल्पकारों की अदभुत शिल्पकला को देखकर आश्चर्य चकित हुए पर्यटक, जहां एक ओर अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव का आगाज हो चुका है, वहीं दूसरी ओर दूसरे प्रदेशों से ब्रह्मïसरोवर के तट पर पहुंचे शिल्पकारों की अदभुत शिल्पकला ने पर्यटकों को आश्चर्य चकित कर दिया है। इस अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मïसरोवर का तट शिल्पकारों की शिल्पकला से सज चुका है और इस शिल्पकला को देखने वाले दूसरे प्रदेशों के पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी इन शिल्पकला को देखकर हैरान हो रहे है।
अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव में 24 दिसंबर 2023 तक चलने वाले सरस और क्राफ्ट मेले में आने वाले पर्यटकों को इस बार अनोखी शिल्पकला देखने को मिल रही है और यहां पर आने वाले सभी पर्यटक इन सभी शिल्पकारों की शिल्पकला से निर्मित वस्तुओं की जमकर खरीददारी कर रहे है। इस महोत्सव में शिल्पकारों की अविश्वनीय शिल्पकला और हाथ की कारागिरी ने ब्रह्मïसरोवर के तट पर लगने वाले सरस और क्राफ्ट मेले की फिजा में रंग भरने का काम किया है, जिससे यहां पर आने वाला प्रत्येक व्यक्ति इस महोत्सव की जमकर प्रंशसा कर रहे है।
महोत्सव के दौरान कुरुक्षेत्र-धर्मक्षेत्र की पावन धरा पर आने वाला प्रत्येक पर्यटक इस महोत्सव का भरपूर आनंद ले रहा है। इस महोत्सव में जहां एक ओर शिल्पकार अपनी शिल्पकला से महोत्सव में रंग भर रहा है, वहीं दूसरी ओर ब्रह्मïसरोवर के तट पर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए एनजेडसीसी की तरफ से बहरूपिए लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बने हुए है और सभी स्थानीय और दूर-दराज से आने वाले पर्यटक इन बहरूपियों के साथ सैल्फी लेकर इस अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव का लुफ्त उठा रहे है।

बनारस के शिल्पकार मोहम्मद हनीफ का महोत्सव के साथ है 24 सालों का नाता
कुरुक्षेत्र 13 दिसंबर बनारस के शिल्पकार मोहम्मद हनीफ का अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव के साथ 24 सालों का नाता रहा है। इस महोत्सव में 1999 से लगातार आ रहे है और महोत्सव में आने वाली बेटियों और महिलाओं के लिए बनारसी सूट, साड़ी और दुपट्टïे तैयार करके लाते है। इस महोत्सव से लगाव होने के कारण हर वर्ष बेसब्री के साथ इंतजार करते है।
शिल्पकार मोहम्मद अनीफ ने अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव-2023 में ब्रहमसरोवर के दक्षिणी छोर पर स्टॉल नंबर 402 लगाया है। इस महोत्सव के लिए बनारसी सूट, साड़ी और दुपट्टïे तैयार करके लाए है। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला की तरफ से देश के हर शिल्प मेले में आमंत्रित किया जाता है, वो अपनी शिल्पकला को लेकर केवल मेलों में ही जाते है। उनकी कहीं पर भी कोई अपनी निजी दुकान नहीं है। इन मेलों के बाद उनके पास जो भी समय बचता है, उस समय में अपनी खड्डिïयों से सूट, साड़ी और दुपट्टïे तैयार करते है।
उन्होंने कहा कि इस शिल्पकला में उनके परिवारों के 1 हजार सदस्य लगे हुए है, सभी बनारसी साड़ी, सूट व दुपट्टïे बनाने का कार्य करते है। उनका यह कार्य पुश्तैनी है। इसलिए इस शिल्पकला से उनके परिवारों का पालन-पोषण भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। सभी सदस्य मेलों में पर्यटकों की मांग को पूरा करने के लिए सूट, साड़ी तैयार करते है। इस महोत्सव में साड़ी की कीमत 1200 से लेकर 5 हजार रुपए, सूट की कीमत 1500 रुपए से लेकर 4 हजार रुपए तक और दुपट्टïों की कीमत 350 रुपए से लेकर 1 हजार रुपए तक रखी हुई है। उन्होंने प्रशासन का आभार व्यक्त किया कि इस मेले में शिल्पकारों को हर प्रकार सुविधा प्रदान की गई है।

पश्मीना शॉल पर तिल्लियों से कढ़ाई करने पर शिल्पकार शहजाद अहमद को मिला राष्टï्रीय अवार्ड
कुरुक्षेत्र 13 दिसंबर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से शिल्पकार शहजाद अहमद ने पश्मीना शॉल पर तिल्लियों से कढ़ाई करके राष्टï्रीय अवार्ड हासिल किया। यह राष्टï्रीय अवार्ड भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय की तरफ से वर्ष 2011 में दिया गया। इस शिल्पकार का अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव के साथ मन से लगाव है। इसलिए पिछले 7 सालों से इस महोत्सव में अपनी शिल्पकला के साथ पहुंच रहे है।
शिल्पकार शहजाद अहमद ने अतंर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव-2023 में शिल्प मेले में स्टॉल नंबर 170 पर अपनी शिल्पकला को सजाया है। शिल्पकार शहजाद अहमद ने बातचीत करते हुए कहा कि उनके परिवार के सभी सदस्य शॉल की कढ़ाई की शिल्पकला में तल्लीन रहते है। इस शिल्पकला को संजो कर रखने के लिए खासा प्रयास कर रहे है। इस शिल्पकला को लेकर उन्होंने पश्मीना शॉल पर तिल्लियों से कढ़ाई करके कानी शॉल तैयार किया। इस शॉल को तैयार करने में लगभग 1 साल का समय लगा और वर्ष 2011 में इस शिल्पकला पर उन्हे भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय की तरफ से राष्टï्रीय अवार्ड दिया गया। इस अवार्ड को लेकर उनके परिवार को खासा उत्साह मिला।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव के साथ-साथ दिल्ली प्रगति मैदान, चंडीगढ़ कला मैदान, उदयपुर सहित एनजेडसीसी की तरफ से जहां-जहां उन्हें आमंत्रित किया जाता है, वहां-वहां वे अपनी शिल्पकला के साथ पहुंच जाते है। इस महोत्सव में पर्यटकों के लिए कानी शॉल, कश्मीरी सूट, कश्मीर का फेमस फेरन, दुपट्टïे विशेष तौर पर लेकर आए है। उन्होंने कहा कि कढ़ाई के द्वारा तैयार की गई पश्मीना कानी शॉल की कीमत 70 हजार रुपए से लेकर 1 लाख 20 हजार रुपए तक की है। इसके अलावा 2500 रुपए तक कश्मीरी सूट की कीमत तय की है। इस महोत्सव में बेटियों के लिए स्टॉल भी लेकर आए है। इस स्टॉल की कीमत 350 रुपए से लेकर 6 हजार रुपए तक की है।

कश्मीर के पारंपरिक परिधानों ने गीता महोत्सव पर मचाई धूम
कुरुक्षेत्र 13 दिसंबर हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के ब्रह्मसरोवर के पावन महोत्सव पर जम्मू कश्मीर ने अनेक शिल्पकार पहुंचे हुए है। इन्ही शिल्पकारों में से एक आकिब यहां जम्मू-कश्मीर से आए हुए है। इनके पास अनेकों तरह के कपड़े है जिनमे से कुछ सूट, फोंचू, शॉल जिनके उपर इस शिल्पकार द्वारा सारा कार्य हाथ से किया गया है। शिल्पकार ने बताया कि कानी वर्क की हैंडलूम पर बनता है। उनके पास इस वर्क से बने कई तरह के परिधान भी है।
शिल्पकारों ने बताया कि कपड़ों पर आरी वर्क भी किया जाता है और ये पिछले दस वर्षो से ये कार्य कर रहे है। वे जम्मू कश्मीर से अपनी पारंपरिक वस्त्र लाए है, जिसे फेरान के नाम से जाना जाता है, जो की एक कुर्ता है यह दिखने मे बड़ा ही अच्छा और आकर्षक है। इनके सामान का मूल्य 700 से 10 हजार तक है। उन्होंने बताया कि वे महोत्सव में काफी समय से अपनी स्टॉल लगाते आ रहे है और यहां आकर बड़ा ही अच्छा महसूस होता है। उनके पास 50 से 60 कारीगर कार्य करते है और वे 5 व्यक्ति मिलकर इन उत्पादों को बेचने का काम करते है।

भारत मां से है प्यार तो मिट्टी से बने उत्पादों को ना करे इनकार
कुरुक्षेत्र 13 दिसंबर हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के ब्रह्मसरोवर पर गीता महोत्सव के सरस मेले पर अनेकों कलाकारों द्वारा अपनी शिल्पकला को प्रदर्शित किया जा रहा है। इस महोत्सव में पानीपत के गडशानी से आए शिल्पकार मुकेश कुमार मिट्टïी से बने अनेक प्रकार के बर्तनों को लेकर पहुंचे है। उनके मिट्टïी के बर्तनों से सजे स्टॉलों पर पर्यटकों की भीड़ देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके यह मिट्टïी से बने बर्तन कितने शानदार है। वे बर्तन बनाते समय लाल और काली मिट्टी का इस्तेमाल करते है।
शिल्पकार मुकेश कुमार ने कहा कि आधुनिकता के कारण कही न कही हम अपनी प्राचीन संस्कृति से दूर होते जा रहे है। गीता महोत्सव के माध्यम से पर्यटकों को फिर से अपनी मिट्टी से जुडऩे का मौका प्रदान करने का काम कर रहे है। पहले सभी लोग मिट्टी के बर्तनों में ही भोजन किया करते थे परन्तु आधुनिकता के चलते सभी लोग स्टील वा एल्यूमीनियम के बर्तन ही इस्तेमाल कर रहे है। उनके द्वारा मिट्टïी के बर्तनों को बड़े ही अनोखे ढंग से तैयार किया गया है, जिनमें बॉटल, प्रेशर कुकर, अचरदानी, तवा इत्यादि सामान शामिल है, जो की देखने में बड़ी ही आकर्षक है और ये बर्तन हानिकारक भी नही है, क्योंकि मिट्टी के बर्तन कीटाणु मुक्त होते है।
शिल्पकार ने कहा कि पहले मिट्टी के बर्तन सिर्फ चूल्हे पर ही इस्तेमाल किए जाते थे परंतु इनके द्वारा बनाए गए बर्तन गैस पर भी इस्तेमाल कर सकते है। उनके द्वारा देश भर में लगने वाले विभिन्न मेलों में अपना स्टॉल स्थापित किया जाता है। हाल ही में ये चंडीगढ़ कलाग्राम से अपनी स्टॉल लगा कर आए है। उनके द्वारा बनाए गए बर्तनों का मूल्य मात्र 100 से 5 हजार तक है। कुरुक्षेत्र की धर्म भूमि पर आकर उन्हें बड़ा ही अच्छा महसूस हो रहा है और यहां का वातावरण बड़ा ही अद्भुत और मन मोहित कर देने वाला है।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में अनेक बीमारियों का एक इलाज, पांगी औषधी लेकर पहुंचे विपन ठाकुर
कुरुक्षेत्र 13 दिसंबर

ब्रह्म सरोवर के पावन तट पर चल रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में सरस और शिल्प मेला पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश के जेंजतिया क्षेत्र से आए विपन ठाकुर द्वारा इस महोत्सव में जड़ी बूटियों से बनी पांगी औषधि लाई गई है, जो प्रधान मंत्री कार्यालय में भी भेजी जाती है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मेडिकल हेरिटेज से प्रशिक्षित विपन ठाकुर ने बताया कि इस हर्बल नुस्खे से सेंसी, पित, कडू, गुरुनु जैसी जड़ी बूटियों के एक्सट्रैक्ट का उपयोग करके उन्होंने मधुमेह, बीपी, हृदय रोग, गठिया, यूरिक एसिड, और पेट समस्याएं ठीक करने में सफलता प्राप्त की है। सरकारी मंजूरी और केंद्र सरकार से मिले सर्टिफिकेट ने इस हर्बल नुस्खे की गुणवत्ता को साबित किया है, जो बिना किसी परहेज या साइड इफेक्ट्स के है। इन जड़ी बूटियों की खास बात यह है कि यह अप्रैल महीने में बर्फ पिघलने के बाद उपलब्ध होती हैं। विपन ठाकुर जो कि एक पूर्व सैनिक हैं, उन्होंने बताया कि वो 8 सालों से गीता महोत्सव में भाग ले रहे हैं। इस वर्ष उनका स्टॉल न. 738 है।हरियाणा और हिमाचल की राज्य सरकारों का उनके सेल्फ हेल्प ग्रुप को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया है। कुरुक्षेत्र में अब तक  उन्होंने 10 से 15 हजार लोगों को बीमारियों से बाहर छुटकारा दिलाया है और इसके 100 प्रतिशत परिणामों ने सबको हैरान कर दिया है। उनके सेल्फ हेल्प ग्रुप से फिलहाल आठ महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
उन्होने बताया कि वह खानदानी वैद्य परिवार से हैं।  उनके द्वारा निर्मित पेट मित्र औषधी जो पेय के रूप में हैं तथा कुछ बूंदे ही एक डोज के लिए पर्याप्त रहती है, की बेहद मांग है, क्योंकि यह औषधी पेट के हर रोग के साथ साथ गैस, पथरी में भी रामबाण साबित होती है और शुगर, बीपी, हार्ट ब्लाकेज, बवासीर तथा अन्य रोगों को भी ठीक करती हैं। पेट मित्र औषधी ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में देश के हर्बल विज्ञान तकनीकी विभाग के डा. जितेंद्र सिंह तक पहुंचती है। क्योंकि उक्त अधिकारी ने कुल्लू जिला के विभागीय प्रदर्शनी में उनके हर्बल उत्पाद खरीदे थे। उसके उपरांत डा. जितेंद्र सिंह ने हर्बल उत्पाद का प्रयोग किया। जिससे उनके स्वास्थ्य पर लाभ मिला।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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