कुरुक्षेत्र, 13 दिसंबर
पूर्व मंत्री एवं हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक अरोड़ा ने प्रशासन द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए भूमि के कलेक्टर रेट बढ़ाने के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रस्तावित रेट 100 से 150 गुणा तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जोकि जनता के साथ सरासर अन्याय है। पहले ही जनता महंगाई की मार झेल रही है अब इन रेटों के बढ़ने से जनता पर और अधिक भार पड़ेगा और यह वृद्धि इतनी अधिक है जिसकी मार झेलना हर व्यक्ति के बस की बात नहीं। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित कलेक्टर रेटों में की गई वृद्धि तुरंत प्रभाव से वापस ली जाए। अरोड़ा ने कहा कि सरकार का काम जनता के कल्याण के लिए कार्य करना है परंतु वर्तमान में भाजपा-गठबंधन सरकार जनकल्याण के कार्य करने की बजाए, खजाना भरने में लगी हुई है और जनता को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रस्तावित कलेक्टर रेटों में प्रस्तावित वृद्धि वापस नहीं ली गई तो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली से हर वर्ग दुखी है। सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने में विफल रही है। अब कलेक्टर रेटों में वृद्धि का प्रस्ताव लाकर जले पर नमक छिड़ने का काम किया जा रहा है।
गीता जयंती का कर दिया व्यवसायीकरण : अरोड़ा
पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा खुली बोली में स्टाल नीलाम करने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक-एक स्टाल सवा लाख तक नीलाम किए गए हैं, जिसका बोझ जनता पर पड़ रहा है। जो दुकानदार इतने महंगे स्टाल लेगा वह अपना माल भी कई गुणा दाम बढ़ाकर बेचेगा, जिसका सीधा बोझ जनता पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने गीता जयंती समारोह का व्यवसायीकरण कर दिया है। एक ओर जहां अत्याधिक महंगे रेट पर स्टाल बेचे जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नेशनल अवार्डी शिल्पकार स्टाल के लिए धक्के खाते घूम रहे हैं। मीडिया के अनुसार अनेक महिला, नेशनल अवार्डी जोकि निमंत्रण पर गीता जयंती समारोह में पहुंचे लेकिन उन्हें स्टाल पाने के लिए कई-कई दिन धक्के खाने पड़े और उसके बाद बड़ी मुश्किल से उन्हें स्टाल मिल रहे हैं। अरोड़ा ने कहा कि गीता जयंती का उत्सव एक आस्था का उत्सव है इस उत्सव का व्यवसायीकरण करना सरासर गलत है। गीता जयंती के स्टालों में 20 रुपये की वस्तु 100 रुपये में बेची जा रही है और इस प्रकार कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की कार्यप्रणाली से जनता की जेबों पर डाका डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरस और शिल्प मेले का उद्देश्य देशभर के हस्तशिल्प को बढ़ावा देना था लेकिन केडीबी ने मेले को पैसे कमाने का साधन बना दिया। अरोड़ा ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के चेयरमैन एवं महामहिम राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मांग की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और गीता जयंती समारोह का व्यवसायीकरण बंद करें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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