पिहोवा 11 सितंबर उपमंडल अधिकारी नागरिक सोनू राम ने बताया कि क्षेत्र में धान की कटाई का कार्य शुरू होने वाला है। कटाई के उपरांत काफी किसान फसल अवशेषों में आग लगाने का कार्य करते हैं। फसल अवशेषों में आग लगाना पर्यावरण के लिए अत्यधिक हानिकारक है। फसल अवशेषों को जलाने से रोकने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
एसडीएम सोनू राम ने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से फैले धुएं की वजह से जहरीली गैस वातावरण में पैदा होती हैं, जो न केवल मनुष्य अपितु जीवन जंतुओं के लिए भी बेहद हानिकारक हैं। फसल अवशेषों को जलाने से फैलने वाले धुएं से फेफड़ों की बीमारियों से ग्रसित मरीज, बुजुर्ग एवं बच्चों के लिए यह अत्यधिक हानिकारक सिद्ध होती हैं। इसके अतिरिक्त भूमि के तापमान में बढ़ोतरी होने के कारण भूमि में उपस्थित लाभकारी जीवाणु भी ख़तम हो जाते हैं, जिससे भूमि के उपजाऊपन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि उपायुक्त कुरुक्षेत्र द्वारा फसल अवशेषों में आग लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है एवं धारा 144 लागू कर दी गई है। यदि फिर भी कोई किसान फसल अवशेषों में आग लगाता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी जिसके तहत प्रति एकड़ 2500 रुपये का जुर्माना निर्धारित है। जुर्माना न भरने की सूरत में एफआईआर भी की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए तीन विभागों कृषि, पंचायत तथा राजस्व की त्रिस्तरीय कमेटी का गठन किया जा चुका है, जिसके अंतर्गत जिला स्तर, खंड स्तर तथा ग्राम स्तरीय पर तीन कमेटी बना दी गई हैं। ये कमेटियां अपने-अपने क्षेत्र में निगरानी रखेंगी एवं फसल अवशेष में आग लगाने वाले किसानों के विरुद्ध कार्यवाही करेंगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन करने पर 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अत: सभी किसानों से अपील की जाती है कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहयोग से मशीनों का उचित उपयोग करके फसल अवशेषों का प्रबंधन करें एवं विभाग द्वारा दी जा रही योजना का लाभ उठायें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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