कम लिंगानुपात वाले 10 गांवों पर पैनी निगाहे रखने के दिए आदेश, भ्रूण के लिंग की जांच करवाने वाले की सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम रखा जाएगा गोपनीय, गांव में 900 से कम लिंगानुपात होने पर एएनएम व आशा वर्कर के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
कुरुक्षेत्र 21 मार्च उपायुक्त शांतनु शर्मा ने कहा कि कुरुक्षेत्र में जिन-जिन गांवों में लडक़ों के मुकाबले लड़कियों का बर्थ रेशों कम है, उन-उन गांवों पर प्रशासन की पैनी निगाहे रहेंगी। इस जिले में लिंगानुपात की स्थिति में सुधार लाने के लिए एएनएम, आशा वर्कर और आंगनवाड़ी वर्कर को गंभीरता के साथ काम करना होगा। इतना ही नहीं जिन गांवों में लिंगानुपात की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, उन-उन गांवों के स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है। प्रशासन ने उन 10 गांवों पर भी समीक्षा की है जहां पर वर्ष 2022 में लडक़ों के मुकाबले कम लड़कियां पैदा हुई है। इन गांवों की एएनएम और आशा वर्कर को आवश्यक हिदायत भी जारी कर दी गई है। अहम पहलू यह है कि इन 10 गांवों में लिंगानुपात की स्थिति को लेकर आगामी 30 दिनों में फिर से समीक्षा भी की जाएगी।
उपायुक्त शांतनु शर्मा मंगलवार को देर सायं लघु सचिवालय के सभागार में पीएनडीटी की जिला टास्क फोर्स की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले सीएमओ डा. सुखबीर सिंह ने कुरुक्षेत्र की सेक्स रेशों 960 के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए कार्यों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और पीएनडीटी के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डा. रमेश सभ्रवाल ने उन 10 गांवों की रिपोर्ट पर प्रकाश डाला, जिन 10 गांवों में लिंगानुपात की स्थिति ठीक नहीं है। उपायुक्त शांतनु शर्मा ने 10 गांवों में लिंगानुपात की स्थिति खराब होने के विषय पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कहा कि गांव कलाल माजरा, आलमपुर, बपदी, बुढा, थडौली, सुल्तानपुर, डाडलू, भौखर माजरा, हमीदपुर और मसाना में काम करने वाली एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी वर्कर को अब गंभीरता से काम करने की जरुरत है। इन सभी कर्मियों को अपनी ड्यूटी को ईमानदारी के साथ-साथ करने साथ अपने नैतिक कर्तव्य का भी निर्वहन करना होगा। इन सभी स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशासन की तरफ से हर संभव सहयोग किया जाएगा, लेकिन यह सहन नहीं किया जाएगा कि गांव में लिंगानुपात की स्थिति खराब है।
उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को हिदायत जारी करते हुए कहा कि लिंग की जांच करवाने वालों पर निगाह रखनी होगी और पल-पल की जानकारी प्रशासन को देनी होगी। गांव का कोई भी व्यक्ति या कर्मी लिंग जांच करने और करवाने वाले की सूचना स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को दे सकता है। ऐसे व्यक्ति का नाम पूर्णत: गोपनीय रखा जाएगा। इतना ही नहीं प्रशासन की तरफ से प्रोत्साहित भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों को 12 से 20 सप्ताह वाली गर्भवती महिला से निरंतर सपंर्क में रहना है, जिन महिलाओं के पास एक या दो लड़कियां है पहले से है, उन पर भी पैनी निगाहे रखनी है। सभी गर्भवती महिलाओं का नियमानुसार रिकार्ड भी रखना है। सभी कर्मियों को गंभीरता के साथ अपनी डयूटी का निवर्हन करना है। अगर किसी स्तर पर कोई कमी पाई गई तो संबंधित कर्मी की जिम्मेवारी भी तय की जाएगी। इस मौके पर डा. गौरव, डा. ऋषि, पीआईसीडीएस नीतू रानी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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किन-किन 10 गांवों में कम है लिंगानुपात
उपायुक्त शांतनु शर्मा ने कहा कि गांव कलाल माजरा में वर्ष 2022 में 16 बच्चों में से 4 लड़कियां पैदा हुई है, इसी तरह गांव आलमपुर में 11 बच्चों में 2 लड़कियां, गांव बपदी कालोनी में 16 में से 3 लड़कियां, बुढा कॉलोनी में 21 में से 7 लड़कियां, थडौली में 19 में से 4 लड़कियां, सुल्तानपुर में 17 में से 4 लड़किया, डाडलू में 14 में से 4 लड़कियां, भौखर माजरा में 15 में से 4 लड़कियां, हमीदपुर में 13 में से 3 लड़कियां तथा गांव मसाना में 16 में से 4 लड़कियां पैदा हुई है। इन 10 गांवों में आशा वर्कर और एएनएम के साथ-साथ आंगनवाड़ी पैनी निगाहें रखेंगी और 1 महीने के बाद दोबारा लिंगानुपात को लेकर समीक्षा की जाएगी।
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भ्रूण के लिंग की जांच करवाने वाले की सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम रखा जाएगा गोपनिय
उपायुक्त शांतनु शर्मा ने कहा कि गर्भवती महिलाओं पर एएनएम, आशा वर्कर नजर रखेंगी और अपने गांवों की महिलाओं से निरंतर तालमेल रखेंगे। अगर गांव या आसपास के क्षेत्र में कोई भी महिला भू्रण के लिंग की जांच करवाती है, इसकी सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाएगा। कोई भी व्यक्ति पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डा. रमेश सभ्रवाल, सीएमओ डा. सुखबीर सिंह या उपायुक्त कार्यालय में सीधा सूचना दे सकता है। इस प्रकार की सूचना देना हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य भी बनता है।
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गांव में 900 से कम लिंगानुपात होने पर एएनएम व आशा वर्कर के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
सीएमओ डा. सुखबीर सिंह ने कहा कि सरकार की हिदायतानुसार अगर किसी भी गांव में लिंगानुपात 900 से कम पाया गया तो संबंधित गांव की एनएमए व आशा वर्कर के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसलिए गांव की गर्भवती महिलाओं पर नजर रखने के साथ-साथ पूरा रिकार्ड रखा जाए। इस विषय को गंभीरता से लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को काम करना होगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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