कुरुक्षेत्र 22 नवंबर मध्य प्रदेश पार्टनर राज्य के बीच बहने वाली नर्मदा नदी के तट पर बसे गांव डिंडोरी की गोंड ट्राइबल आर्ट्स पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस प्रसिद्ध कला को पहली बार अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के स्टॉल नंबर 116 पर देखा जा सकता है। यह शिल्पकला अपने आप में एक अनोखी शिल्पकला है। इस शिल्पकला के लिए एक्रेलिक्स रंग और कैनवस का प्रयोग किया जाता है। इस शिल्पकला को महोत्सव में आने वाले पर्यटक खुब सराहा रहे है।
मध्य प्रदेश के गांव ढिंढौरी से आए संतु सिंह टेकम का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2022 में पहली बार आए है। इस बार मध्य प्रदेश पार्टनर राज्य होने के कारण जनजाति संग्रहालय भोपाल की तरफ से भेजा गया है। इस महोत्सव में मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध पेंटिंग कला को लेकर आए है। इस पेंटिंग कला को गोंड ट्राइबल आर्ट के नाम से जाना जाता है। यह आर्ट पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस कला को वर्ष 2006 से अडोप्ट किया था और अपने पूर्वजों से इस कला की सौगात मिली थी। इस कला को लेकर उन्हें दिल्ली, लखनऊ सहित अन्य राज्यों में विशेष प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि यह कैनवस पर एक्रिलिक रंग से ब्रश के माध्यम से की जाती है, यह सारा कार्य हाथ के साथ किया जाता है और कुछ पेंटिंग हैंडमेड पेपर पर भी बना कर लाए है। इस आर्ट के जरिए वॉल पेंटिंग, होटल, कार्यालयों में भी किसी विशेष थीम को लेकर पेंटिंग की जा सकती है। इस महोत्सव में पृथ्वी और पर्यावरण थीम पर कैनवस पेंटिंग बनाकर लाए है। इन पेंटिंग की कीमत 1 हजार रुपए से लेकर 55 हजार रुपए तक है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *