करनाल, 
 10 जुलाई।     विधायक हरविंद्र कल्याण ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह के नेतृत्व में सरकार पूरे हरियाणा में गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों की स्थापना में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में ऊर्जा विभाग ने प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ट्रांसमिशन परियोजनाओं से प्रभावित भूमि मालिकों को उचित मुआवजा देने हेतु एक नई मुआवजा नीति शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य भूमि मालिकों, विशेष रूप से किसानों और ट्रांसमिशन यूटिलिटीज के बीच लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को हल करना है। उन्होंने कहा कि इस नई नीति से किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे में पर्याप्त वृद्धि होगी और इसका उद्देश्य प्रभावित भूमि मालिकों के लिए उचित मुआवजा सुनिश्चित करते हुए ट्रांसमिशन लाइनों के कार्यान्वयन को सुव्यवस्थित करना है। इस पहल से राज्य के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलने और इसके बहुमुखी विकास में योगदान मिलने की उम्मीद है।
विधायक ने बताया कि हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड को ट्रांसमिशन लाइनों की स्थापना के दौरान भूमि मालिकों, विशेषकर किसानों व लाइन निर्माण इकाई में गतिरोध रहा है जिससे की इस अहम व आधारभूत निर्माण मे विलंब हो रहा है। इस नीति के क्रियान्वयन से अब आधारभूत निर्माण में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ट्रांसमिशन लाइनों के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के मुआवजे हेतु जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हरियाणा सरकार ने इस नीति को मंजूरी दी है।
 नई नीति में किए गए प्रावधान
विधायक हरविंद्र कल्याण ने जानकारी देते हुए बताया कि भूमि अधिग्रहण के बिना भूमि मूल्य के 200 प्रतिशत की दर पर टावर बेस एरिया का मुआवजा देना, जहाँ ट्रांसमिशन टावर स्थापित किए जाते हैं। इसके विपरीत, पिछली नीति में टावर बेस एरिया के लिए मुआवजा भूमि मूल्य के 100 प्रतिशत की दर पर निर्धारित किया गया था। इसी प्रकार से ट्रांसमिशन लाइन कॉरिडोर के लिए भूमि मूल्य के 30 प्रतिशत की दर पर राइट ऑफ वे कॉरिडोर के लिए मुआवजे का प्रावधान है। इसके विपरीत, पिछली नीति में राइट ऑफ वे कॉरिडोर के लिए मुआवजा शामिल नहीं था।
उन्होंने कहा कि किसानों के लिए फसलों का मुआवजा पूर्व नीति के अनुसार ही दिया जाएगा। मुआवजे की दरें भूमि के सर्किल रेट अथवा कलेक्टर रेट के आधार पर निर्धारित की जाएंगी। इसके अलावा, जहां भूमि के मार्किट रेट सर्किल/कलेक्टर रेट से अधिक होते हैं, वहां मुआवजे की गणना करने हेतु भूमि दर निर्धारित करने के लिए जिला स्तर पर उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, जिला राजस्व अधिकारी और अधीक्षण अभियंता (एचवीपीएनएल) की एक ‘उपयोगकर्ता समिति’का गठन किया गया है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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