पूरे विश्व को समन्वयता, अनुकूलता, सामंजस्य का संदेश देने वाला दिव्य अद्भुत ग्रंथ है श्रीमद्भगवद् गीताः बंडारू दत्तात्रेय
जीवन की हर समस्या का हल है गीताः मनोहर लाल
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद् गीता सदन में श्रीमद्भगवद्गीता के परिप्रेक्ष्य में विश्वशान्ति एवं सद्भाव विषय पर आयोजित संगोष्ठी का माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया उद्घाटन

कुरुक्षेत्र, 29 नवम्बर। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि गीता सम्पूर्ण जीवन को जीने की संहिता है। श्रीमद् भगवद् गीता जीवन के द्वन्दों से बाहर निकालती है। 21वीं सदी के युग में तनाव, दुविधा, अप्रसन्नता से मुक्ति का रास्ता श्रीमद्भगवद् गीता हमें दिखाती है। इसको अपने व्यवहार में शामिल कर ही स्थिर, सफल व दुविधा रहित जीवन की दिशा में हम आगे बढ़ सकते हैं। वे मंगलवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आडिटोरियम हॉल में श्रीमद्भगवद्गीता के परिप्रेक्ष्य में विश्वशान्ति एवं सद्भाव विषय पर आयोजित 7वीं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्यातिथि बोल रही थी।
इससे पहले भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म, हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा के शिक्षामंत्री कंवर पाल, गीता के प्रणेता एवं गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, नेपाल के राजदूत डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा, स्वामी गोविन्द गिरी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विधिवत रूप से दीप प्रज्ज्चलित कर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस मौके पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की स्मारिका व जनरल आफ हरियाणा स्टडीज के विशेष अंक की प्रति भेंट की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सर्वेक्षण योजना, हरियाणा ई-टिकटिंग परियोजनाएं तथा सिरसा में 950 करोड रूपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज का भी आनलाईन उद्घाटन किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि श्रीममद्भगवद्गीता सही अर्थो में एक अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक है। अनेक भाषाओं में गीता के कई  अनुवाद हो चुके हैं। यह भारत वर्ष का सबसे प्रसिद्ध व लोकप्रिय ग्रंथ है। जितनी टीकाए गीता पर लिखी गई है उतनी शायद ही किसी अन्य पुस्तक पर लिखी गई होगी। जिस तरह योग पूरे विश्व समुदाय को भारत की सौगात है उसी तरह योगशास्त्र गीता भी पूरी मानवता को भारत माता का आध्यात्मिक उपहार है। गीता पूरी मानवता के लिए एक जीवन संहिता है। आध्यात्मिक दीप स्तंभ है। गीता कायरता को छोडने और वीरता को अपनाने का उपदेश देती है। हरियाणा के वीर जवानों, मेहनती किसानों व संघर्ष करने वाली बेटियों ने गीता के उपदेश को अपने जीवन में ढालकर अपने कर्मक्षेत्र में हरियाणा व पूरे देश का गौरव बढ़ाया है।
हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि गीता को हमें अपने जीवन में धारण करने की आवश्यकता है। आधुनिक युग की समस्याओं का हल हम भगवद्गीता में ढूूंढ सकते हैं। गीता का प्रमुख उद्देश्य सभी परिस्थितियों में व्यक्ति को अपने कर्तव्य पथ से विचलित ना होने का संदेश देना है। श्रीमद्भगवद्गीता जिसे सम्मान से गीतोपनिषद् भी कहा जाता है, भारतीय धर्म, दर्शन और अध्यात्म का सार है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई है। इस शिक्षा नीति में गीता के उपदेश के आधार पर  नैतिक मूल्यों, नेतृत्व, कर्म, कर्तव्य, जिम्मेवारी, प्रगति का समावेश किया गया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कुरुक्षेत्र कर्म योग की यह पावन धरा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कर्मयोगिनी के रूप में हरियाणा की धरती पर प्रथम आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि स्थान एवं समय के साथ यह सुअवसर महत्वपूर्ण है। कर्मयोग के बल पर ही साधारण परिवार में जन्मी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने असाधारण सफलताएं अर्जित की है तथा उनका राष्ट्रपति भवन तक का सफर हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अनेक बाधाओं के बावजूद दृढ़संकल्प होकर अपने गांव से कॉलेज जाने वाली पहली बेटी भी बनी। गरीब सपने देख भी सकता है और पूरा भी कर सकता है यह साक्षात परिणाम है। उन्होंने कहा कि गीता के पहले क्षेत्र में कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र की संज्ञा दी गई है। गंगा के जल से मुक्ति प्राप्त होती है, वाराणसी की भूमि व जल दोनों में मोक्ष की शक्ति है और कुरुक्षेत्र के जल, थल और वायु तीनों ही मुक्ति प्रदाता है। मान्यता यह भी है कि कोई व्यक्ति कुरुक्षेत्र में निवास रखने की इच्छा रखता है तो उसे भी मुक्ति मिल जाती है। पावन सरस्वती की नदी के तट पर ही वेदों और उपनिषदों और पुराणों की रचना हुई। हर्षवर्धन की राजधानी स्थानेश्वर को थानेसर के नाम से जाना जाता है। कुरुक्षेत्र की महता को जानते हुए भगवान कृष्ण ने महाभारत की युद्धभूमि के रूप में चुना था। उन्होंने मोहग्रस्त अर्जुन को कर्मयोग का दिव्य संदेश देकर मानव मात्र के कल्याण का कार्य किया।
हरियाणा के शिक्षामंत्री कंवरपाल ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि गीता में लिखे गए उपदेश हमारी सारी समस्याओं का तुरन्त हल कर देते हैं और हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं, साथ ही सफल जीवन की प्रेरणा देते हैं। गीता का उपदेश किसी एक मजहब अथवा धर्म के लिए नहीं है। भगवान कृष्ण ने संपूर्ण मानव जाति के कल्याणार्थ यह उपदेश दिया है। आज जहां मनुष्य भौतिक सुखों, काम वासनाओं, विलासिता में जकड़ा हुआ है  और  एक दूसरे की हानि करने में लगा हुआ है तब यही गीता का ज्ञान उसे अज्ञानता के अंधकार से मुक्त कर सकता है।
जीओ गीता के संस्थापक एवं प्रणेता स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवदगीता के निहित संदेश के साथ वैश्विक सोच का उद्घोष होगा। जब युद्धभूमि में दोनों सेनाएं सामने थी तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मोह एवं विषाद को दूर करने के लिए गीता का पवित्र संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मानव की मुस्कान है गीता, समस्याओं का समाधान है गीता। जहां विज्ञान, सत्ता मौन हो जाती है वहां मानसिक शांति एवं सदभाव के लिए गीता तनाव एवं अवसाद का दूर करती है। गीता पढ़कर ही मानसिक शक्ति, आदर्शों एवं जीवन मूल्यों के व्यक्तित्व का विकास होगा।समूचे विश्व एवं मानवता के लिए श्रीमद्भगवद् गीता एक परम उदाहरण है।
स्वामी गोविन्द गिरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत का सार है। जो सम्पूर्ण राष्ट्र को एक रस बना सकती है। गीता विजय व उत्थान का ग्रंथ है। गीता आगे आने वाली पीढ़ियों का धर्म ग्रंथ होगा।
इस मौके सांसद नायब सैनी, सांसद रतनलाल कटारिया, खेल मंत्री संदीप सिंह, विधायक सुभाष सुधा, कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा,  नेपाल के राजदूत डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा,  उपायुक्त शांतनु शर्मा, कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा, प्रो. मंजूला चौधरी, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. वनिता ढींगरा, एसपी सुरेन्द्र भौरिया, केडीबी मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा, केडीबी सदस्य सौरभ चौधरी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अनिल वशिष्ठ, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. शुचिस्मिता, प्रो. अनिल गुप्ता, डॉ. दीपक राय बब्बर, डॉ. महासिंह पूनिया सहित डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, प्रिंसीपल, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद थे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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