पिहोवा 17 अप्रैल कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के खंड कृषि अधिकारी पिहोवा डा. प्रदीप कुमार ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान गेहूं की कटाई एवं भूसा बनाने के बाद अनावश्यक रूप से फसल अवशेषों में आग न लगाए। फसल अवशेषों में आग लगाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषण होता है बल्कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने वाली जैविक कार्बन की भी क्षति होती है। फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से न केवल अति महत्वपूर्ण जैविक कार्बन की वृद्धि होती है इसके साथ साथ मित्र सूक्ष्म जीव व मित्र कीटों की मात्रा में भी वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि किसान इसके अतिरिक्त गेहूं एवं भूसा इत्यादि कार्य के उपरांत खेत में ढैंचा या मूंग की बिजाई कर सकते हैं। ढैंचा या मूंग की बिजाई से किसान खेत में जैविक कार्बन बढ़ा सकता है जिससे खेत की उपजाऊ शक्ति में वृद्धि होती है एवं आने वाले सीजन में बिजाई के उपरांत फसल में यूरिया खाद की आवश्यकता में कमी आती है एवं फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। ढैंचा की फसल को किसान 40 दिन का होने पर भूमि में मिला कर किसान लाभ ले सकता है। मूंग की बिजाई से किसानों को दोहरा लाभ होता है, क्योंकि मुंग से न केवल किसान मूंग की तुड़ाई करके आर्थिक लाभ ले सकता है अपितु तुड़ाई के बाद भूमि में मिलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए किसान फसल अवशेषों में आग लगाने से बचें एवं इन अवशेषों को ढैंचा या मूंग के साथ भूमि में मिला लें ताकि भूमि एवं पर्यावरण का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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