देशभर के शिक्षकों और शिक्षाविदों ने शिक्षा को अधिक रचनात्मक, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के की चर्चा
कुरुक्षेत्र, 29 सितम्बर : कुरुक्षेत्र में देशभर के शिक्षकों और शिक्षाविदों ने शिक्षा को अधिक रचनात्मक, प्रभावी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने को लेकर व्यापक मंथन किया। शिक्षा सागर फाउंडेशन कुरुक्षेत्र द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक संगोष्ठी एवं राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक सम्मान–2026 में देश के 26 राज्यों से लगभग 200 शिक्षक एवं शिक्षाविद शामिल हुए।
दो दिवसीय आयोजन में शिक्षा के समसामयिक मुद्दों, नवाचारों, शोध और सफल शैक्षणिक प्रयोगों पर गंभीर चर्चा हुई। गीता ज्ञान संस्थान, कुरुक्षेत्र में आयोजित संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से पहुंचे शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारी प्रयोगों और गतिविधि आधारित शिक्षण के अनुभव साझा किए। शिक्षकों ने विभिन्न शैक्षणिक विषयों पर शोध-पत्रों का वाचन किया तथा विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता बढ़ाने, कक्षा शिक्षण को रोचक एवं प्रभावी बनाने, तकनीक के सार्थक उपयोग और स्थानीय संसाधनों को शिक्षण से जोड़ने जैसे विषयों पर विचार रखे।
संगोष्ठी का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रभावी शैक्षिक प्रयोगों को साझा मंच उपलब्ध कराना तथा शिक्षकों के बीच अनुभवों और विचारों का व्यापक आदान-प्रदान करना रहा। प्रतिभागियों ने अपने नवाचारों, रचनात्मक गतिविधियों और कक्षा-कक्ष में अपनाई जा रही नई शिक्षण विधियों की जानकारी साझा की। विभिन्न राज्यों से आए। शिक्षक प्रतिभागियों ने लोक संस्कृति का प्रदर्शन भी किया। कार्यक्रम में प्रो. डा.अजय रंगा, वाइस चांसलर अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. ब्रह्मजीत सिंह, निदेशक प्रभारी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र ने की।
इस अवसर पर डा. लिली दीवान, डीन, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र, समरवीर सिंह ओएसडी अध्यक्ष, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी, डा. सुरेश राणा, निशा राणा तथा कार्यक्रम संयोजिका सुशीला जांगड़ा सहित अनेक शिक्षक एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। समारोह के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय नवाचारी शिक्षक सम्मान–2026 से सम्मानित किया गया। सम्मान के लिए शिक्षकों के शैक्षणिक नवाचार, विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम, गतिविधि आधारित शिक्षण, रचनात्मक कार्यों, सामाजिक सरोकारों तथा विद्यालय एवं समाज के लिए किए गए उल्लेखनीय प्रयासों को आधार बनाया गया।
शिक्षा सागर फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य डा.सुरेश राणा एवं कार्यक्रम संयोजिका सुशीला जांगड़ा ने कहा कि शिक्षकों के नवाचारों और सफल शैक्षणिक प्रयोगों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। शिक्षक सम्मान केवल उपलब्धियों की पहचान नहीं, बल्कि शिक्षा में निरंतर नवाचार, रचनात्मकता और गुणवत्तापूर्ण प्रयासों के लिए प्रेरणा का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों के अनुभवों और नवाचारों को साझा करने से अन्य शिक्षक भी उनसे सीख सकेंगे तथा विद्यालयी शिक्षा में नए और प्रभावी प्रयोगों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
दो दिवसीय आयोजन में शैक्षणिक संवाद, शोध-पत्र वाचन, नवाचारों की प्रस्तुति और अनुभवों के आदान-प्रदान ने कुरुक्षेत्र को देशभर के शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षिक संवाद मंच के रूप में स्थापित किया। इस कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक गुजरात से शैलेश प्रजापति, गायत्री मिश्रा छत्तीसगढ़, नंदी बहुगुणा उत्तराखंड, महेश त्रिवेदी मध्य प्रदेश, प्रेम सखी बिहार, संजीव कुमार उत्तर प्रदेश, सुरेंद्र सिंह हिमाचल प्रदेश, गुरमेल संघल पंजाब, कावेरी चन्दा पश्चिम बंगाल, निशा केरला आदि प्रदेश संयोजक उपस्थित रहे।
फोटो परिचय : कार्यक्रम में शामिल हुए शिक्षक एवं विद्वान।
