कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को किसानों को जागरूक करने तथा फसल अवशेष न जलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश
अंबाला 29, सितम्बर-

फसल अवशेष प्रबंधन एवं धान की पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से आज एसडीएम अंबाला शहर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस उप अधीक्षक, एस0एच0ओ0, कृषि विभाग से  उपकृषि निदेशक डा0 वजीर सिंह , तहसीलदार, खण्ड विकास एंव पचांयत अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपमण्डल अधिकारी व वीएलडीए स्टाफ, पटवारी, ग्राम सचिव तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फसल अवशेष प्रबंधन के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई तथा उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में किसानों के बीच जाकर फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन के लिए किसानों को प्रेरित करें।
बैठक का मुख्य उद्देश्य किसानों को जागरूक करते हुए यह सुनिश्चित करना रहा कि धान की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को किसी भी स्थिति में न जलाया जाए तथा उपलब्ध कृषि यंत्रों एवं वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से उनका उचित प्रबंधन किया जाए। एसडीएम अंबाला शहर ने कहा कि फसल अवशेष खेत के लिए बोझ नहीं, बल्कि उचित प्रबंधन किए जाने पर उपयोगी संसाधन हैं। पराली को खेत में मिलाने, मल्चिंग करने, पशु चारे के रूप में उपयोग करने तथा अन्य उपयोगी तरीकों से इसका प्रबंधन किया जा सकता है। इससे एक ओर जहां खेत की मिट्टी की गुणवत्ता एवं जैविक पदार्थ में सुधार होता है, वहीं दूसरी ओर किसानों को फसल अवशेष जलाने की समस्या से भी निजात मिलती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे केवल कार्यालय स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि गांव-गांव और खेत-खेत जाकर किसानों से सीधा संवाद करें। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनरी, तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए और उन्हें यह समझाया जाए कि पराली जलाने से होने वाले नुकसान की तुलना में उसका उचित प्रबंधन किसान के लिए अधिक लाभकारी है।
बैठक में यह भी बताया गया कि फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त आग लगाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव एवं पोषक तत्व प्रभावित होते हैं तथा खेत की उर्वरा शक्ति पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। आग की घटनाओं से खेतों के आसपास खड़ी अन्य फसलों, पेड़-पौधों, बिजली की लाइनों तथा संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है।

गांव स्तर पर बढ़ाई जाएगी जागरूकता
बैठक में कृषि विभाग के कर्मचारियों, वीएलडीए, पटवारी एवं ग्राम सचिवों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखें। धान की कटाई के दौरान विशेष रूप से संवेदनशील गांवों एवं क्षेत्रों में निगरानी रखते हुए किसानों को समय रहते फसल अवशेष प्रबंधन के उचित विकल्पों के बारे में जानकारी दी जाए। वहीं पशुपालन विभाग के वीएलडीए स्टाफ द्वारा किसानों को फसल अवशेषों के उपयोग एवं पशुओं के लिए उपलब्ध चारे से संबंधित उचित जानकारी प्रदान करने पर भी जोर दिया गया।
मौके पर उपस्थित को कहा गया कि फसल अवशेष प्रबंधन केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी संबंधित विभागों, कर्मचारियों और किसानों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। जब प्रशासन, विभागीय कर्मचारी और किसान मिलकर कार्य करेंगे, तभी फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रूप से नियंत्रण पाया जा सकेगा।

किसानों से की गई अपील

बैठक के माध्यम से किसानों से अपील की गई कि वे धान की फसल की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को आग न लगाएं। किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करते हुए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर, रोटावेटर तथा अन्य उपलब्ध कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं। इससे पराली का खेत में ही उचित प्रबंधन किया जा सकता है और अगली फसल की बुवाई भी समय पर की जा सकती है। किसानों को यह संदेश भी दिया गया कि पराली नहीं जलाएंगे, खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाएंगे और पर्यावरण को स्वच्छ बनाएंगे।
प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि वे किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के संबंध में लगातार जागरूक करते रहें और खेतों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

पराली प्रबंधन अपनाएं- धरती, हवा और आने वाली पीढ़ी बचाएं
बैठक में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए प्रेरित करेंगे तथा फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध विकल्पों की जानकारी किसानों तक पहुंचाएंगे।
प्रशासन का उद्देश्य किसानों पर किसी प्रकार का अनावश्यक दबाव बनाना नहीं, बल्कि जागरूकता, सहयोग और प्रभावी निगरानी के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देना है। किसानों से भी अपील की गई कि वे प्रशासन एवं विभागीय कर्मचारियों का सहयोग करें और फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित एवं वैज्ञानिक प्रबंधन करें। बैठक में अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया गया कि सम्बधिंत विभागों के अधिकारी क्षेत्र में रहकर हर गतिविधियों पर नजर रखते हुए कार्य करें। इस मौके पर सम्बध्ंिात विभागों के अधिकारीगण मौजूद रहें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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