मृतकों के परिवारों को ₹25-₹25 लाख मुआवजा देने की मांग; बोले—जग्गी से जुड़े लोगों की भूमिका और निगम अधिकारियों की जवाबदेही की भी जांच करे SIT
अंबाला। वीरेश शांडिल्य ने धूलकोट में निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने से छह मजदूरों की मौत के मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि छह परिवार उजड़ चुके हैं और अब केवल FIR दर्ज करना तथा SIT गठित करना पर्याप्त नहीं है। SIT को हादसे के प्रत्येक पहलू की गहराई से जांच करनी चाहिए और जिन लोगों की आपराधिक जिम्मेदारी साक्ष्यों के आधार पर सामने आती है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई एवं गिरफ्तारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
शांडिल्य ने कहा कि हरदीप सिंह जग्गी पुत्र करतार सिंह तथा सर्बजोत सिंह जग्गी पुत्र हरदीप सिंह जग्गी की भूमिका को लेकर सामने आए तथ्यों और आरोपों की निष्पक्ष एवं तेजी से जांच की जाए। जांच में यदि उनके या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी का कानूनी आधार और पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो पुलिस बिना किसी दबाव या प्रभाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का प्रभाव या रसूख कानून से बड़ा नहीं हो सकता और साथ ही किसी को जांच पूरी होने से पहले दोषी भी घोषित नहीं किया जाना चाहिए।
शांडिल्य ने सिविल अस्पताल में मृतकों के परिवारों द्वारा जताए गए रोष का जिक्र करते हुए कहा कि परिजनों ने आरोप लगाया है कि जग्गी पक्ष से जुड़ा बताया जा रहा एक व्यक्ति करीब ₹8 लाख लेकर कथित तौर पर समझौते अथवा ‘सेटिंग’ के उद्देश्य से उनके पास पहुंचा था। उन्होंने कहा कि यह गंभीर आरोप है और SIT को इसकी भी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए कि संबंधित व्यक्ति कौन था, वह रकम किस उद्देश्य से लेकर आया था और क्या उसे किसी व्यक्ति द्वारा भेजा गया था। आरोप की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
शांडिल्य ने कहा कि मृतकों के परिजनों ने मौके पर रोष जताते हुए कथित तौर पर कहा, “₹8 लाख हमें दे दो और ₹8 लाख हमसे ले लो, लेकिन जग्गी को हमारे सामने लाओ।” उन्होंने कहा कि इससे पीड़ित परिवारों की भावना स्पष्ट होती है कि वे किसी आर्थिक समझौते के बजाय न्याय और कानून के अनुसार कार्रवाई चाहते हैं। छह मजदूरों की मौत अत्यंत गंभीर घटना है और पीड़ित परिवारों द्वारा लगाए गए प्रत्येक गंभीर आरोप की जांच होनी चाहिए।
वीरेश शांडिल्य ने कहा कि प्रीत नगर स्थित करतार हवेली, मकान नंबर 100 पर पुलिस की कथित छापेमारी अथवा दबिश की जानकारी सामने आई है, जबकि शहर में जग्गी के विदेश चले जाने को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि विदेश जाने संबंधी चर्चा को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन पुलिस को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि जांच एजेंसी के पास किसी आरोपी अथवा जांच के दायरे में आए व्यक्ति के देश छोड़ने की वास्तविक आशंका के संबंध में कोई तथ्य है तो कानून के तहत आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए।
शांडिल्य ने नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गरीब व्यक्ति का छोटा सा अवैध कब्जा निगम अधिकारियों को तुरंत दिखाई देता है तो इतनी बड़ी निर्माणाधीन बिल्डिंग का निर्माण संबंधित अधिकारियों की जानकारी में क्यों नहीं आया, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि बिल्डिंग की अलग प्रॉपर्टी ID नहीं थी अथवा निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति में कोई कमी थी तो इसकी वास्तविक स्थिति सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर सार्वजनिक होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हादसे के बाद बैक डेट में नोटिस तैयार किए जाने संबंधी जो आरोप सामने आ रहे हैं, उनकी भी SIT को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। बिना जांच किसी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए, लेकिन रिकॉर्ड की प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए इस निर्माण से संबंधित नगर निगम का नोटिस रजिस्टर, प्रॉपर्टी ID रिकॉर्ड, बिल्डिंग ब्रांच की फाइलें, निरीक्षण रिपोर्ट, फाइल मूवमेंट तथा अन्य संबंधित दस्तावेज तत्काल जब्त अथवा सुरक्षित किए जाने चाहिए।
शांडिल्य ने कहा कि यदि जांच में किसी नगर निगम अधिकारी की मिलीभगत, संरक्षण, जानबूझकर की गई लापरवाही अथवा अन्य आपराधिक भूमिका के साक्ष्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कानून के अनुसार FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी को पहले से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह पता लगाना होना चाहिए कि इतनी बड़ी निर्माणाधीन इमारत किन अनुमतियों के आधार पर बन रही थी और संबंधित सरकारी विभागों ने समय रहते क्या कार्रवाई की थी।
वीरेश शांडिल्य ने हरियाणा सरकार से हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह मजदूरों के परिवारों को ₹25-₹25 लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छह मजदूरों की मौत से छह परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूटा है और सरकार को उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को देखते हुए पर्याप्त सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
शांडिल्य ने कहा, “हमारी मांग किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी ठहराने की नहीं है। हमारी मांग है कि छह मौतों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो, पीड़ित परिवारों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता सामने आए और जिसकी भी कानूनी जिम्मेदारी साक्ष्यों से स्थापित हो, उसके खिलाफ बिना किसी दबाव या भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने तक उनकी आवाज मजबूती से उठाई जाएगी।”
शांडिल्य ने कहा कि हरदीप सिंह जग्गी पुत्र करतार सिंह तथा सर्बजोत सिंह जग्गी पुत्र हरदीप सिंह जग्गी की भूमिका को लेकर सामने आए तथ्यों और आरोपों की निष्पक्ष एवं तेजी से जांच की जाए। जांच में यदि उनके या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी का कानूनी आधार और पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो पुलिस बिना किसी दबाव या प्रभाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का प्रभाव या रसूख कानून से बड़ा नहीं हो सकता और साथ ही किसी को जांच पूरी होने से पहले दोषी भी घोषित नहीं किया जाना चाहिए।
शांडिल्य ने सिविल अस्पताल में मृतकों के परिवारों द्वारा जताए गए रोष का जिक्र करते हुए कहा कि परिजनों ने आरोप लगाया है कि जग्गी पक्ष से जुड़ा बताया जा रहा एक व्यक्ति करीब ₹8 लाख लेकर कथित तौर पर समझौते अथवा ‘सेटिंग’ के उद्देश्य से उनके पास पहुंचा था। उन्होंने कहा कि यह गंभीर आरोप है और SIT को इसकी भी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए कि संबंधित व्यक्ति कौन था, वह रकम किस उद्देश्य से लेकर आया था और क्या उसे किसी व्यक्ति द्वारा भेजा गया था। आरोप की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
शांडिल्य ने कहा कि मृतकों के परिजनों ने मौके पर रोष जताते हुए कथित तौर पर कहा, “₹8 लाख हमें दे दो और ₹8 लाख हमसे ले लो, लेकिन जग्गी को हमारे सामने लाओ।” उन्होंने कहा कि इससे पीड़ित परिवारों की भावना स्पष्ट होती है कि वे किसी आर्थिक समझौते के बजाय न्याय और कानून के अनुसार कार्रवाई चाहते हैं। छह मजदूरों की मौत अत्यंत गंभीर घटना है और पीड़ित परिवारों द्वारा लगाए गए प्रत्येक गंभीर आरोप की जांच होनी चाहिए।
वीरेश शांडिल्य ने कहा कि प्रीत नगर स्थित करतार हवेली, मकान नंबर 100 पर पुलिस की कथित छापेमारी अथवा दबिश की जानकारी सामने आई है, जबकि शहर में जग्गी के विदेश चले जाने को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि विदेश जाने संबंधी चर्चा को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन पुलिस को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि जांच एजेंसी के पास किसी आरोपी अथवा जांच के दायरे में आए व्यक्ति के देश छोड़ने की वास्तविक आशंका के संबंध में कोई तथ्य है तो कानून के तहत आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए।
शांडिल्य ने नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गरीब व्यक्ति का छोटा सा अवैध कब्जा निगम अधिकारियों को तुरंत दिखाई देता है तो इतनी बड़ी निर्माणाधीन बिल्डिंग का निर्माण संबंधित अधिकारियों की जानकारी में क्यों नहीं आया, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि बिल्डिंग की अलग प्रॉपर्टी ID नहीं थी अथवा निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति में कोई कमी थी तो इसकी वास्तविक स्थिति सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर सार्वजनिक होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हादसे के बाद बैक डेट में नोटिस तैयार किए जाने संबंधी जो आरोप सामने आ रहे हैं, उनकी भी SIT को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। बिना जांच किसी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए, लेकिन रिकॉर्ड की प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए इस निर्माण से संबंधित नगर निगम का नोटिस रजिस्टर, प्रॉपर्टी ID रिकॉर्ड, बिल्डिंग ब्रांच की फाइलें, निरीक्षण रिपोर्ट, फाइल मूवमेंट तथा अन्य संबंधित दस्तावेज तत्काल जब्त अथवा सुरक्षित किए जाने चाहिए।
शांडिल्य ने कहा कि यदि जांच में किसी नगर निगम अधिकारी की मिलीभगत, संरक्षण, जानबूझकर की गई लापरवाही अथवा अन्य आपराधिक भूमिका के साक्ष्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कानून के अनुसार FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी को पहले से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह पता लगाना होना चाहिए कि इतनी बड़ी निर्माणाधीन इमारत किन अनुमतियों के आधार पर बन रही थी और संबंधित सरकारी विभागों ने समय रहते क्या कार्रवाई की थी।
वीरेश शांडिल्य ने हरियाणा सरकार से हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह मजदूरों के परिवारों को ₹25-₹25 लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छह मजदूरों की मौत से छह परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूटा है और सरकार को उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को देखते हुए पर्याप्त सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
शांडिल्य ने कहा, “हमारी मांग किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी ठहराने की नहीं है। हमारी मांग है कि छह मौतों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो, पीड़ित परिवारों द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता सामने आए और जिसकी भी कानूनी जिम्मेदारी साक्ष्यों से स्थापित हो, उसके खिलाफ बिना किसी दबाव या भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने तक उनकी आवाज मजबूती से उठाई जाएगी।”
