कुरुक्षेत्र, 08 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शनिवार को केयू धरोहर संग्रहालय में कुवि के पूर्व छात्र एवं महान सपूत कैप्टन संदीप सांखला को उनके बलिदान दिवस पर याद करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा सहित अन्य अधिकारियों ने कैप्टन संदीप सांखला, वीर चक्र से सम्मानित शहीद सेकेंड लेफ्टिनेंट राजेन्द्र सिंह नागर और शहीद कैप्टन जिंटू गोगोई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कैप्टन संदीप सांखला की शहादत हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि अशोक चक्र से सम्मानित कैप्टन संदीप सांखला देश और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का गौरव है। उनके बलिदान दिवस पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय उनको नमन करता है।
कार्यक्रम में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, प्रो. जीपी दुबे, प्रो. संजीव अरोड़ा, प्राचार्या प्रो. रीटा, प्रो. कुसुम लता, धरोहर के प्रोफेसर इंचार्ज व युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला, मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. आनंद कुमार, कुटा प्रधान डॉ. जितेन्द्र खटकड़, लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया, डॉ. सौरभ चौधरी, प्रो. परमेश कुमार, प्रो. दीपक राय बब्बर, प्रो. शुचिस्मिता, डॉ. हरविन्द्र सिंह लोंगोवाल, डॉ. निधि माथुर, सुरेन्द्र, सहित शिक्षक, शोधार्थी, अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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कैप्टन संदीप सांखला का जीवन परिचय
कैप्टन संदीप सांखला हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले थे तथा उनके पिता भी भारतीय सेना में थे। कैप्टन संदीप सांखला ने 1984 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के आईआईएचएस से स्नातक की डिग्री हासिल की तथा 14 जून, 1986 को उनका सपना पूरा हुआ जब वे भारतीय सेना की 18 डोगरा रेजीमेंट में कमीशंड हुए। कैप्टन संदीप सांखला के जफरखान गांव में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए देश के लिए शहीद हो गए थे। उन्होंने आर्मी में 5 साल तक सेवा दी। मेजर संदीप ने उस दौरान 9 आतंकवादियों को मार गिराया था। उनकी इस शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। भारत के राष्ट्रपति की ओर से उन्हें मरणोपरांत 26 जनवरी, 1992 को ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया।
