कुरुक्षेत्र, 08 अगस्त 2026। गुरुकुल कुरुक्षेत्र का प्राकृतिक कृषि फार्म देशभर के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती की जीवंत पाठशाला बन चुका है। राजस्थान के अलवर जिले से कृषि अधिकारियों सहित 32 सदस्यीय किसान दल ने गुरुकुल पहुंचकर पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती के सिद्धान्तों, तकनीकों और इसके व्यावहारिक स्वरूप को नजदीक से जाना। गुरुकुल के प्राकृतिक फार्म पर विकसित विविध फसलों, अत्याधुनिक बागवानी तथा पर्यावरण संरक्षण के मॉडल ने किसानों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
दिल्ली में समाजसेवी सिद्धार्थ गौतम द्वारा संचालित डेवलपमेंट फाउंडेशन के सहयोग से अलवर से पहुंचे इस दल में कृषि अधिकारी उम्मेद सिंह व सुभरती सहित 30 किसान शामिल रहे। 03 से 07 अगस्त तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पक्ष के साथ-साथ खेत पर इसके व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी दी गई।
प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पहलुओं को समझा
प्रशिक्षण के दौरान प्राकृतिक खेती के विशेषज्ञ डाॅ. हरिओम एवं डाॅ. बलजीत सहारण ने किसानों को प्राकृतिक खेती के मूलभूत सिद्धान्तों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने खेत में केंचुओं की उपयोगिता, ऑर्गेनिक कार्बन, सूक्ष्म जीवों की भूमिका तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर किसानों का मार्गदर्शन किया। किसानों ने विशेषज्ञों की बातों को बेहद रुचि और तन्मयता से सुना तथा अपने अनुभवों से जुड़े प्रश्न भी पूछे।
ड्रैगन फ्रूट से लेकर स्ट्रॉबेरी तक—बागवानी ने मोहा मन
गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म का भ्रमण करते हुए किसानों ने यहां विकसित विभिन्न फसलों एवं बागवानी का अवलोकन किया। ड्रैगन फ्रूट, खजूर, अन्ना सेब, केला, ताईवान अमरूद, स्ट्रॉबेरी, आम और लीची सहित अनेक फलों की शानदार बागवानी देखकर किसान खासे प्रभावित हुए। खेतों में विकसित हरी सब्जियों का ‘एटीएम मॉडल’ भी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा।
प्राकृतिक फार्म पर केंचुए, चिड़िया, गौरैया जैसे मित्रजीवों की मौजूदगी ने भी किसानों का ध्यान आकर्षित किया। प्राकृतिक वातावरण में जैव-विविधता की इस उपस्थिति ने किसानों को यह समझने का अवसर दिया कि प्राकृतिक खेती केवल रसायनों से दूरी बनाने का नाम नहीं, बल्कि मिट्टी, पानी, फसल, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की समग्र पद्धति है।
धान में 50 प्रतिशत तक पानी बचाने की तकनीक ने किया प्रभावित
कृषि फार्म पर डाॅ. शुवेन्दु सोलंकी एवं डाॅ. गगनदीप सिंह ने किसानों को विभिन्न फसलों की प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दल में शामिल किसान दयाचन्द, कन्हैया लाल, रंजीत, सोहनलाल, मनीष कुमार एवं कैलाश सहित अन्य किसानों ने खेतों में खड़ी धान एवं अन्य फसलों का बारीकी से निरीक्षण किया।
इस अवसर पर डाॅ. शुवेन्दु सोलंकी ने बताया कि गुरुकुल के फार्म पर धान की खेती में लगभग 50 प्रतिशत तक पानी की बचत की जा रही है। धान के खेत में लगातार पानी खड़ा रखने के बजाय आवश्यकता के अनुसार कई दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जाती है। जल संरक्षण की इस तकनीक को किसानों ने बेहद उपयोगी बताते हुए अपने क्षेत्रों में अपनाने में रुचि दिखाई।
प्राकृतिक खेती किसान के साथ प्रकृति और जीव-जगत के लिए भी हितकारी : रामनिवास आर्य
प्रशिक्षण के समापन पर गुरुकुल के व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने सभी प्रतिभागी किसानों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि महामहिम राज्यपालश्री आचार्य देवव्रत जी का प्राकृतिक खेती मिशन किसानों के आर्थिक हित के साथ-साथ पर्यावरण और जीव-जगत के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने से गोवंश संरक्षण, जल संरक्षण, पर्यावरण की स्वच्छता, मिट्टी की उर्वरा शक्ति में वृद्धि तथा लोगों को शुद्ध एवं सुरक्षित अन्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को अपनाएं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद अलवर से आए किसानों ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक कृषि फार्म को प्राकृतिक खेती के सिद्धान्तों को समझने और उन्हें खेतों में व्यवहारिक रूप से देखने का उत्कृष्ट केन्द्र बताया तथा यहां प्राप्त अनुभवों को अपने क्षेत्रों में लागू करने का संकल्प लिया।
