कुरुक्षेत्र, 7 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज़ में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं मार्गदर्शन के लिए शुक्रवार को नवदीक्षा एवं विद्यार्थी स्वागत समारोह आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है जो ज्ञान बढ़ाए, व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए और उसके चरित्र का निर्माण करे। इसी प्रकार ब्लूम द्वारा प्रतिपादित शिक्षा के तीन प्रमुख आयाम ज्ञान (नॉलेज), कौशल (स्किल) और दृष्टिकोण (एटिट्यूड) आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इसलिए सफलता के लिए इन तीनों का संतुलित विकास आवश्यक है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि उन्हें ऐसे विश्वविद्यालय में अध्ययन का अवसर मिला है, जिसे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा सर्वोच्च ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सभी प्रमुख प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले अग्रणी विश्वविद्यालयों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शामिल है। उन्होंने बताया कि आईआईएचएस ने नई शिक्षा नीति को सबसे पहले अपनाते हुए विद्यार्थियों को बहु विषयक शिक्षा, स्किल एनहांसमेंट, एबिलिटी एन्हांसमेंट तथा वैल्यू एडेड कोर्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। अब विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न विषयों का चयन कर सकते हैं।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक युवा आत्मानुशासित, स्वावलंबी और राष्ट्र के प्रति समर्पित बने। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान हमारी पहचान और संस्कारों का प्रतीक है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि असफलता की जिम्मेदारी स्वयं लेना और सफलता का श्रेय अपनी टीम को देना ही श्रेष्ठ नेतृत्व और उच्च चरित्र का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भी ऐसे ही नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ मस्तिष्क, हृदय और हाथ तीनों का विकास है। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विद्यार्थियों को जीवन में तीन सी जिज्ञासा (क्यूरोसिटी), आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिंकिंग) और रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी जानकारी को बिना जांचे-परखे स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि विभिन्न स्रोतों से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से समस्याओं के नए समाधान खोजने और नवाचार की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब रचनात्मक विचार व्यवहार में उतरता है तो वह नवाचार बन जाता है। विश्वविद्यालय के दो इन्क्यूबेशन सेंटर विद्यार्थियों को अपने विचारों को उत्पाद और स्टार्टअप में बदलने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। विश्वविद्यालय नवाचार आधारित परियोजनाओं के लिए 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अर्न वाइल लर्न की अवधारणा अपनाने और पढ़ाई के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र स्वरोजगार और उद्यमिता है। इसलिए विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहकर रोजगार देने वाले युवा बनने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। विश्वविद्यालय का उद्देश्य भी विद्यार्थियों को ऐसा सक्षम बनाना है कि वे अध्ययन पूर्ण करने के बाद अपने स्टार्टअप और उद्यम स्थापित कर सकें।
विशिष्ट अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें हरियाणा के अग्रणी संस्थान में प्रवेश मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एनसीसी, एनएसएस, यूथ रेड क्रॉस, खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के अनेक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने, अनुशासन बनाए रखने तथा अध्ययन के साथ अपने व्यक्तित्व के विकास पर भी विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
प्राचार्या प्रो. रीटा ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान में प्रवेश उनके जीवन की नई और महत्वपूर्ण शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, समर्पण और निरंतर परिश्रम को सफलता की कुंजी बताते हुए शैक्षणिक, खेल, सांस्कृतिक तथा अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंच का संचालन प्रो. विवेक चावला ने किया। अंत में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सभी विद्यार्थियों को स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहने की शपथ दिलाई।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि उन्हें ऐसे विश्वविद्यालय में अध्ययन का अवसर मिला है, जिसे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा सर्वोच्च ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त है। उन्होंने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सभी प्रमुख प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले अग्रणी विश्वविद्यालयों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शामिल है। उन्होंने बताया कि आईआईएचएस ने नई शिक्षा नीति को सबसे पहले अपनाते हुए विद्यार्थियों को बहु विषयक शिक्षा, स्किल एनहांसमेंट, एबिलिटी एन्हांसमेंट तथा वैल्यू एडेड कोर्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। अब विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न विषयों का चयन कर सकते हैं।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक युवा आत्मानुशासित, स्वावलंबी और राष्ट्र के प्रति समर्पित बने। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान हमारी पहचान और संस्कारों का प्रतीक है।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि असफलता की जिम्मेदारी स्वयं लेना और सफलता का श्रेय अपनी टीम को देना ही श्रेष्ठ नेतृत्व और उच्च चरित्र का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भी ऐसे ही नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ मस्तिष्क, हृदय और हाथ तीनों का विकास है। कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विद्यार्थियों को जीवन में तीन सी जिज्ञासा (क्यूरोसिटी), आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिंकिंग) और रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी जानकारी को बिना जांचे-परखे स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि विभिन्न स्रोतों से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से समस्याओं के नए समाधान खोजने और नवाचार की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब रचनात्मक विचार व्यवहार में उतरता है तो वह नवाचार बन जाता है। विश्वविद्यालय के दो इन्क्यूबेशन सेंटर विद्यार्थियों को अपने विचारों को उत्पाद और स्टार्टअप में बदलने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। विश्वविद्यालय नवाचार आधारित परियोजनाओं के लिए 25 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अर्न वाइल लर्न की अवधारणा अपनाने और पढ़ाई के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र स्वरोजगार और उद्यमिता है। इसलिए विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहकर रोजगार देने वाले युवा बनने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। विश्वविद्यालय का उद्देश्य भी विद्यार्थियों को ऐसा सक्षम बनाना है कि वे अध्ययन पूर्ण करने के बाद अपने स्टार्टअप और उद्यम स्थापित कर सकें।
विशिष्ट अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें हरियाणा के अग्रणी संस्थान में प्रवेश मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एनसीसी, एनएसएस, यूथ रेड क्रॉस, खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के अनेक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने, अनुशासन बनाए रखने तथा अध्ययन के साथ अपने व्यक्तित्व के विकास पर भी विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
प्राचार्या प्रो. रीटा ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान में प्रवेश उनके जीवन की नई और महत्वपूर्ण शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, समर्पण और निरंतर परिश्रम को सफलता की कुंजी बताते हुए शैक्षणिक, खेल, सांस्कृतिक तथा अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंच का संचालन प्रो. विवेक चावला ने किया। अंत में कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सभी विद्यार्थियों को स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित रहने की शपथ दिलाई।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, प्रॉक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. आनंद कुमार, चीफ वार्डन प्रो. कुसुम लता, प्रो. परमेश कुमार, प्रो. नवनीत बहल, डॉ. सतीश सहित संस्थान के शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद थे।
