कुरुक्षेत्र, 05 अगस्त 2026:
गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी की प्रेरणा से देशभर में प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसी कड़ी में गुरुकुल कुरुक्षेत्र स्थित ‘प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण केन्द्र’ में उत्तराखण्ड के टीहरी गढ़वाल जिले से आए 30 से अधिक किसानों और कृषि अधिकारियों के दल ने 2 से 5 अगस्त तक आयोजित तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि अधिकारी मुकेश व प्रवेश जोशी तथा किसान रणबीर सिंह, ओमप्रकाश, दिलीप सिंह और रामचन्द्र सहित पूरे दल ने गुरुकुल के प्राकृतिक फार्म का भ्रमण किया। फार्म में बिना रासायनिक उर्वरकों के उगाई जा रही धान, ड्रैगन फ्रूट और हरी सब्जियों की लहलहाती फसलों को देखकर किसानों ने अत्यधिक प्रसन्नता और आश्चर्य व्यक्त किया।
वैज्ञानिक पक्ष और भविष्य की आवश्यकता:
प्रशिक्षण सत्र में विख्यात कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. हरिओम एवं डॉ. बलजीत सहारण ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पहलुओं को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “प्राकृतिक खेती आने वाले समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि हमने रासायनिक खेती का त्याग नहीं किया, तो भावी पीढ़ियों के पास न शुद्ध पेयजल बचेगा, न उपजाऊ भूमि और न ही स्वच्छ पर्यावरण।”
किसान और पर्यावरण हितैषी मॉडल:
गुरुकुल के व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने राज्यपाल आचार्यश्री का संदेश देते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती के व्यापक प्रचार-प्रसार का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से एक ओर जहाँ गोवंश का संरक्षण होता है, वहीं मित्रकीटों और सूक्ष्मजीवों का भी बचाव होता है जो मृदा स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कोई कमी नहीं आती, बल्कि लागत शून्य होने और बाजार में उपज का दोगुना मूल्य मिलने से किसानों की आय में वृद्धि होती है।
प्रमाण-पत्र वितरण:
प्रशिक्षण के सफल समापन पर गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग एवं पद्मश्री डॉ. हरिओम द्वारा सभी प्रतिभागी किसानों एवं अधिकारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर कृषि अधिकारी डॉ. शिवेंदु, डॉ. गगनदीप और प्रकाश थापा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
