कुरुक्षेत्र, 4 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र तथा पर्यावरण अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) प्रायोजित द्वि-साप्ताहिक ऑनलाइन बहुविषयक पुनश्चर्या पाठ्यक्रम ’’‘पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं सततता की दिशा में कार्य’’’ का समापन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव लेफ्टिनेंट (डॉ.) वीरेंद्र पाल ने कहा कि उच्च शिक्षा में पर्यावरणीय चेतना, सतत विकास तथा अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन ज्ञान, समसामयिक दृष्टिकोण एवं शोध की नवीन कार्यप्रणालियों से समृद्ध कर शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाते हैं।
पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान, कौशल एवं दृष्टिकोण को समृद्ध करने के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पूजा अरोड़ा तथा सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की ।
यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र की निदेशक प्रो. प्रीति जैन ने प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम के सफल समापन पर शुभकामनाएं देते हुए शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा अनुसंधान में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने पाठ्यक्रम का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए दो सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी व्याख्यानों, शैक्षणिक गतिविधियों तथा प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता का उल्लेख किया।
कार्यक्रम का समापन यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के उपनिदेशक डॉ. नीरज बातिश के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव लेफ्टिनेंट (डॉ.) वीरेंद्र पाल ने कहा कि उच्च शिक्षा में पर्यावरणीय चेतना, सतत विकास तथा अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों को नवीन ज्ञान, समसामयिक दृष्टिकोण एवं शोध की नवीन कार्यप्रणालियों से समृद्ध कर शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाते हैं।
पर्यावरण अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान, कौशल एवं दृष्टिकोण को समृद्ध करने के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पूजा अरोड़ा तथा सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की ।
यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र की निदेशक प्रो. प्रीति जैन ने प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम के सफल समापन पर शुभकामनाएं देते हुए शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा अनुसंधान में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने पाठ्यक्रम का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए दो सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी व्याख्यानों, शैक्षणिक गतिविधियों तथा प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता का उल्लेख किया।
कार्यक्रम का समापन यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के उपनिदेशक डॉ. नीरज बातिश के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
