कुरुक्षेत्र, 30 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी प्रायोजित दो-सप्ताहीय बहुविषयक रिफ्रेशर कोर्स पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं सतत विकास की दिशा में कार्य के आठवें दिन यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) तथा पर्यावरण अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में तकनीकी व्याख्यानों एवं सहभागितापूर्ण समूह चर्चाओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास, नैतिक मूल्यों तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के विचार सुने और अपने अनुभव साझा किए।
प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. रमा उमेश पांडे’’ ने ’जलवायु-अनुकूल निर्मित पर्यावरण’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसे बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके। उन्होंने ग्रीन बिल्डिंग, ऊर्जा दक्ष तकनीकों, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण पद्धतियों तथा सतत शहरी नियोजन की अवधारणाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
द्वितीय सत्र में प्रो. नरेंद्र सिंह, वनस्पति विज्ञान विभाग, ने समूह चर्चा का संचालन किया। प्रतिभागियों ने समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों, सतत विकास तथा वैज्ञानिक समाधानों पर विचार-विमर्श करते हुए विभिन्न दृष्टिकोण साझा किए और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। प्रो. नरेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक सोच और नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
तृतीय तकनीकी सत्र में प्रो. मंजुला चौधरी ने आचार संहिता विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन में नैतिक मूल्यों, ईमानदारी, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वस्थ एवं सकारात्मक कार्य-संस्कृति के निर्माण के लिए आचार संहिता का पालन अत्यंत आवश्यक है।
चतुर्थ सत्र में प्रो. जितेंद्र शर्मा, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, ने समूह चर्चा का संचालन किया। प्रतिभागियों ने दिनभर के व्याख्यानों से प्राप्त ज्ञान का विश्लेषण करते हुए पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए नवीन एवं व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रभावी संवाद और टीमवर्क के महत्व पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बहुविषयक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। अंत में पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पूजा ने सभी वक्ताओं एवं समूह चर्चा के समन्वयकों का आभार व्यक्त किया, जबकि डॉ. भावना दहिया ने प्रतिभागियों को अगले दिन के तकनीकी सत्रों एवं गतिविधियों की जानकारी दी।
प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. रमा उमेश पांडे’’ ने ’जलवायु-अनुकूल निर्मित पर्यावरण’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसे बुनियादी ढांचे का विकास आवश्यक है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके। उन्होंने ग्रीन बिल्डिंग, ऊर्जा दक्ष तकनीकों, पर्यावरण-अनुकूल निर्माण पद्धतियों तथा सतत शहरी नियोजन की अवधारणाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
द्वितीय सत्र में प्रो. नरेंद्र सिंह, वनस्पति विज्ञान विभाग, ने समूह चर्चा का संचालन किया। प्रतिभागियों ने समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों, सतत विकास तथा वैज्ञानिक समाधानों पर विचार-विमर्श करते हुए विभिन्न दृष्टिकोण साझा किए और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। प्रो. नरेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक सोच और नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
तृतीय तकनीकी सत्र में प्रो. मंजुला चौधरी ने आचार संहिता विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन में नैतिक मूल्यों, ईमानदारी, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वस्थ एवं सकारात्मक कार्य-संस्कृति के निर्माण के लिए आचार संहिता का पालन अत्यंत आवश्यक है।
चतुर्थ सत्र में प्रो. जितेंद्र शर्मा, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, ने समूह चर्चा का संचालन किया। प्रतिभागियों ने दिनभर के व्याख्यानों से प्राप्त ज्ञान का विश्लेषण करते हुए पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए नवीन एवं व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रभावी संवाद और टीमवर्क के महत्व पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बहुविषयक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। अंत में पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पूजा ने सभी वक्ताओं एवं समूह चर्चा के समन्वयकों का आभार व्यक्त किया, जबकि डॉ. भावना दहिया ने प्रतिभागियों को अगले दिन के तकनीकी सत्रों एवं गतिविधियों की जानकारी दी।
