कुरुक्षेत्र, 29 जुलाई। कुरु़क्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र तथा पर्यावरण अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पर्यावरणीय चुनौतियाँ एवं सततता की दिशा में कार्य विषयक यूजीसी प्रायोजित द्वि-साप्ताहिक बहुविषयक पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के सातवें दिन आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, सतत कृषि तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।
प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. अनीता मान ने क्रिस्पर-कैस के माध्यम से फसल सुधार विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि जीन संपादन की यह अत्याधुनिक तकनीक अधिक उत्पादक, पोषणयुक्त तथा सूखा, लवणता एवं उच्च तापमान जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने वाली फसल किस्मों के विकास में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से कीट एवं रोग प्रतिरोधी फसलों का विकास, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता में कमी तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. संजीव अरोड़ा ने प्लास्टिक प्रदूषण से सतत समाधान तकः विज्ञान, नवाचार एवं जनसहभागिता’ विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण के कारण पर्यावरण, जैव विविधता तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैव-अवक्रमणीय पदार्थों का उपयोग, उन्नत पुनर्चक्रण, अपशिष्ट से संसाधन निर्माण तथा परिपत्र अर्थव्यवस्था जैसे उपाय इस समस्या के स्थायी समाधान सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने जन-जागरूकता, उत्तरदायी उपभोग एवं प्रभावी नीतियों के क्रियान्वयन पर भी विशेष बल दिया। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित समूह चर्चाओं में प्रतिभागियों ने पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
समापन सत्र में पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. पूजा ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन शोधार्थियों और शिक्षकों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने आगामी सत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों से सक्रिय सहभागिता बनाए रखने का आग्रह किया।
