प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. बिलाल अहमद भट्ट ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण से ही पर्यावरण का भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने वन्यजीवों के समक्ष आवास विनाश, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सामुदायिक सहभागिता, संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन एवं सुदृढ़ संरक्षण नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया। द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. हरदीप राय शर्मा ने स्रोत स्तर पर अपशिष्ट पृथक्करण, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग), कम्पोस्टिंग, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) की अवधारणा को प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आवश्यक बताया। साथ ही जन-जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता को भी इसकी सफलता का आधार बताया।
तृतीय तकनीकी सत्र में प्रो. नमिता जोशी ने नवाचार आधारित शिक्षण, सहयोगात्मक अनुसंधान तथा उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रतिभागियों को अपने शिक्षण एवं शोध कार्यों में अंतर्विषयक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। दिन के अंतिम सत्र में जलवायु परिवर्तनः वैश्विक समस्या, स्थानीय समाधान विषय पर समूह चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम के छठे दिन का समापन कोर्स समन्वयक डॉ. पूजा द्वारा सभी विशिष्ट वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ हुआ। उन्होंने प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए इसे ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया। सह-समन्वयक डॉ. भावना दहिया ने प्रतिभागियों को अगले दिन आयोजित होने वाले तकनीकी सत्रों एवं कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया।
