आरटीआई के जवाब से साफ होता है स्टेडियम ढांचे की आई.आई.टी या एनआईटी के विशेषज्ञों से कोई जांच नहीं हुई : चित्रा सरवारा
33 हज़ार टन लोहे की जगह 13 हज़ार टन से बना स्टेडियम 3500 दर्शकों का बोझ लेगा? : चित्रा सरवारा
फुटबॉल स्टेडियम में अगर कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा? : चित्रा सरवारा
अम्बाला छावनी- भ्रष्टाचार के विवादों में घिरे अंबाला छावनी के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल स्टेडियम की तकनीकी और बुनियादी सुरक्षा और बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के उसे चालू करने पर आम आदमी पार्टी की नेता चित्रा सरवारा ने सरकार से सवाल कर स्टेडियम की जांच और ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए चेताया कि अगर असुरक्षित स्टेडियम में बच्चे, खिलाड़ी और जनता को बुलाया गया तो कहीं मोरबी पुल जैसी बहुत बड़ी दुर्घटना अंबाला में ना घट जाए।
हरियाणा के गृह मंत्री वपूर्व खेल मंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय फुटबाल स्टेडियम में हुआ घोटाला प्रदेश का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स घोटाला है जिसमें कथित आरोपों के अनुसार 117 करोड़ में से लगभग 66 करोड़ का गबन हुआ है। अर्थिक अनियमितताओं से अलग सबसे चिंताजनक इल्ज़ाम जो प्रोजेक्ट पर उठे वो हैं कि स्टेडियम में आर्किटेक्ट- इंजीनियर द्वारा निर्धारित सामग्री से कम समान लगा है! इंजीनियर की ड्राइंग और टेन्डर के हिसाब से स्टेडियम में 33 हजार टन लोहा लगना था और कथित माल की खरीद और जांच में पाया गया है कि मात्र 13 हजार टन ही लगा है। जरूरत से 20 हजार टन कम लोहे की बनी इमारत कितनी सुदृढ़ और सुरक्षित है, कब तक सुदृढ़ और सुरक्षित है, ये आज बहुत बड़ा और गंभीर सवाल है जिस पर यहां आने वाले खिलाडियों और दर्शकों की जान अटकी है।
16 फरवरी 2022 में अखबारों में जहां स्टेडियम के अर्थिक घोटाले की पर्तें खुलने लगी, वहीँ ये भी लिखा आया कि स्टेडियम के पिलरों को जमीन में बांधने वाले नटबोल्ट भी निर्धारित लंबाई और साइज के नहीं हैं I सरकार ने कथित ‘कड़ा रुख’ अपनाते हुए आई.आई.टी मद्रास, एन.आई.टी कुरुक्षेत्र और पंजाब यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की टीम का ऐलन किया जो स्टेडियम की इमारत के ढांचे की सुदृढ़ता की जांच कर तीन महीने में रिपोर्ट देने वाली थे। उस खबर को आज एक साल से ऊपर हो गया है लेकिन सरकार की उस कमिटी की और उसकी गुणवत्ता रिपोर्ट की कोई खबर नहीं।
चित्रा ने कहा यह बात 22 फरवरी 2023 तारिख को डाली गई एक आर.टी.आई से जाहिर हुई जिसमें सवाल पूछा गया था कि स्टेडियम से संबंधित आई.आई.टी की रिपोर्ट कहाँ है। जवाब आया कि स्टेडियम के ढांचे की गुणवत्ता का निरीक्षण नक्शा बनने पर एन.आई.टी कुरुक्षेत्र द्वारा किया गया था, यानी काम शुरू करने से पहले। इमारत बनने के बाद, घोटाला उजागर होने के बाद, एन.आई.टी कुरूक्षेत्र की कोई रिपोर्ट नहीं। ना ही कोई रिपोर्ट आई.आई.टी मद्रास के विशेषज्ञों से ली गई है, जैसा की सरकार द्वारा आश्वासन दिया गया था। पंजाब यूनिवर्सिटी को इस रिपोर्ट के लिए ‘गुजारिश’ भेजी गई है लेकिन इसके आगे कोई स्पष्टीकरण नहीं। इस जवाब से यही निश्कर्ष निकालता है कि बड़े- बड़े प्रतिष्ठित कॉलेज विशेषज्ञों द्वारा जांच का दिलासा मात्र लोगों की आँखों में धूल झोंकने का काम था। सरकार ना घोटाला करने वालों को पकड़ने में इच्छुक है और ना ही जनता की सुरक्षा के लिए गंभीर है।
हाल ही में इस स्टेडियम में अंबाला फुटबाल संघ द्वारा अंडर 14 और अंडर 17 का फुटबॉल मैच कराया गया जहां रात की जगमगाती लाइट में खिंची तस्वीरें मीडिया में सांझी करी गई। उन जगमगाती तस्वीरों में शायद इमारत के असली हालात छुप जाते हों लेकिन सरकार और आयोजक अपनी जवाबदेही से नहीं छुप सकते।
चित्रा ने कहा आज हमारा सवाल सरकार, संबंधित मंत्रालय और संबधित प्रशासनिक दफ्तर से है कि अंबाला अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल स्टेडियम की गुणवत्ता रिपोर्ट कहाँ है? सरकार वो रिपोर्ट सार्वजानिक करे और लोगों को पता चले ये स्टेडियम बच्चे भेजने और मैच देखने के लिए सुरक्षित है कि नहीं।
चित्रा ने कहा सरकार,मंत्रालय और डिपार्टमेंट ये भी सार्वजानिक करें कि किन मापदंडों पर इस इमारत को सुरक्षित घोषित किया गया है। इस इमारत में कितना लोहा है, अगर कमी थी तो कैसे, कब और कहां पूरी करी गई? लोगों का अधिकार है जानना की इमारत कितनी और कब तक सुरक्षित है।
चित्रा ने सरकार से गुजारिश करी कि जब तक वो रिपोर्ट सार्वजानिक ना हो तब तक स्टेडियम में किसी भी खिलाड़ी या दर्शक को भेज कर उसकी जान जोखिम में ना डाली जाए। आज हम हरियाणा के मुख्यमंत्री,देश के प्रधानमंत्री,देश के गृह मंत्री,हरियाणा के मुख्यमंत्री,गृह मंत्री खेल मंत्री, पीडब्लूडी से गुजारिश करते हैं कि वे सभी को इस मामले का तुरंत संज्ञान लें और उचित कारवाई करें।
चित्रा ने सरकार से ये भी गुजारिश की कि असुरक्षित स्टेडियम में मैच करवाने वाले संस्थान और आयोजकों को कारण-दिखाओ नोटिस भेज पूछा जाए ये फैसला किसने और क्यूँ लिया। अगर मैच के दौरान कोई दुर्घटना घट जाती तो इसकी जिम्मेवारी निर्धारित होती उनसे जवाब लिया जाए और अगर कोई नजरअंदाजी स्पष्ट होती है तो इस्तीफा भी लिया जाए I
चित्रा सरवारा ने कहा कि आज देश के अलग-अलग कोनों से एक के बाद एक हृदयविदारक दुर्घटनाओं का मंज़र हमारी आंखों के आगे आ रहा है I गुजरात के मोरबी पुल हादसे में कुछ ऐसा ही हुआ था। लागत से कम पैसों में पुल का नवीकरण कर, बिना जांच, बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ उसे पब्लिक के लिए खोल दिया गया गया और 135 लोगों की जान चली गई I 120 व्यक्ति की क्ष्मता वाला एक पुल 135 की जान ले सकता है तो सोचिए 3500 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम में कहीं कोई हादसा हो गया तो जान माल के नुकसान का आंकड़ा कितना दिल दहलाने वाला होगा I
बिहार में 1700 करोड़ का पुल रेट के टीले की तरह गंगा में समा गया क्यूंकि गलत बनावट के कारण उसके ढांचे में कमी थी जो उसके पतन का कारण बनी I ओडिशा का ट्रेन हादसा भी नयी सुरक्षा प्रणाली को लागू करने में और पुराने ढांचे की सही मरम्मत और रखरखाव के प्रशासनिक अभाव के कारण हुआ I आज इस अंधेपन की कीमत सैकड़ों परिवारों ने चुकाई है I बिना ढांचे और इमारत की जांच के और गुणवत्ता रिपोर्ट के स्टेडियम को चालू करना अंबाला में भी ऐसे एक हादसे की नींव तो नहीं रख रहा??
इस अवसर पर मुख्य रूप से आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष राजपाल राजा,पूर्व पार्षद वरिष्ट नेता सुरेश त्रेहन,वीरेंदर गांधी,गगन डांग, अविनाश,विजय गुम्बर उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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