चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग में कंप्यूटर साइंस, कामर्स और मैनेजमेंट विषयों के अनुबंधित/अस्थायी रूप से कार्यरत व्याख्याताओं (लेक्चररों) को बड़ी राहत प्रदान की है।

अदालत ने उनकी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के दावों पर निर्धारित अवधि के भीतर विधिसम्मत निर्णय लिया जाए।

हाई कोर्ट ने कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे लंबे समय से उच्च शिक्षा विभाग में व्याख्याता के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और उन्हें हरियाणा सरकार की 16 जून 2014 की नियमितीकरण नीति का लाभ मिलना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि हाल ही में 16 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने ‘मदन सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य’ मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। इस फैसले के आलोक में याचिकाकर्ता नियमितीकरण के पात्र हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी जाए।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा कि यदि सभी याचिकाकर्ता चार सप्ताह के भीतर अपना प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करते हैं तो उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक उनके मामलों पर विचार करेंगे।

साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और लागू नियमों के अनुसार प्रत्येक मामले में कारण युक्त एवं विस्तृत आदेश पारित किया जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिकाओं का निपटारा कर दिया।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रतिनिधित्व दाखिल किए जाने के बाद उच्च शिक्षा निदेशक छह माह के भीतर उस पर अंतिम निर्णय लें। इसके साथ ही अदालत ने आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित छह माह की अवधि के भीतर निर्णय नहीं लिया गया तो संबंधित अधिकारी को प्रत्येक याचिकाकर्ता को 50 हजार रुपये की राशि का जुर्माना के तौर पर का भुगतान करना होगा।
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इससे पहले पिछले दिनों हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया था कि वह कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावों पर अब पुरानी नीतियों की सामान्य व्याख्या के बजाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 अप्रैल 2026 को दिए गए ‘मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ निर्णय के आधार पर नए सिरे से विचार करे।
कोर्ट ने हरियाणा सरकार, बिजली निगमों, नगर निगमों, हाउसिंग बोर्ड और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं को निर्देश दिया था कि वे प्रत्येक कर्मचारी के मामले की व्यक्तिगत जांच कर छह माह के भीतर कारण युक्त यानी स्पीकिंग आर्डर पारित करें। अदालत ने यह भी साफ किया कि जब तक संबंधित कर्मचारी के दावे पर अंतिम प्रशासनिक निर्णय नहीं हो जाता, तब तक उसकी मौजूदा सेवा स्थिति में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं किया जाएगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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