पानीपत। भाजपा ने दूसरी बार महिला को राज्य संगठन की कमान सौंपी हैं। वैश्य समाज से और महिला को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने जातीय संतुलन के साथ नारी सशक्तीकरण का संदेश दिया है। अर्चना गुप्ता का कहना है कि जब उन्हें प्रदेशाध्यक्ष बनाने की जानकारी मिली तो वह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में थीं।

भाजपा आम कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी देती है। नव-नियुक्त प्रदेशाध्यक्ष ने बूथस्तर कार्यकर्ता से लेकर मुख्यमंत्री तक भाजपा की कार्यशैली को ‘सेवा भाव’ से जोड़ते हुए कहा कि संगठन में फैसले सामूहिक होते हैं।

महिला सशक्तीकरण, समाजसेवा और मजबूत संगठन को अपनी नई जिम्मेदारी का आधार बताते हुए उन्होंने दैनिक जागरण के वरिष्ठ मुख्य उपसंपादक विनोद कुमार से राजनीतिक यात्रा के कई पहलू साझा किए।

प्रश्न : नया संगठन बनाएंगी अथवा पुराना ही जारी रहेगा?
उत्तर : संगठन में बदलाव होगा। वरिष्ठों से बातचीत करके नए और पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का समन्वय बनाया जाएगा। पार्टी तय करेगी कुछ कार्यकर्ता पुराने भी रहेंगे, कुछ नए भी जुड़ेंगे। भाजपा में निर्णय सामूहिक होते हैं। वरिष्ठों, राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री मोदी के दिशा निर्देश पर ही निर्णय लिये जाते हैं।

प्रश्न : अब आपकी सबसे बड़ी चुनौती सरकार और संगठन के बीच समन्वय बनाकर चलने की है। इसे कैसे देखती हैं?
उत्तर : सरकार भी अपनी और संगठन भी अपना है। कोई चुनौती नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री भी भाजपा के कार्यकर्ता हैं। वह भी बूथ स्तर से लेकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं। मंत्री हो या मुख्यमंत्री सभी स्वयं कार्यकर्ता ही मानते हैं। नायब सैनी स्वयं को मुख्यमंत्री तो मानते ही नहीं, सेवक मानते है।

प्रश्न : प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में कई दिग्गज थे, आपको बनाए जाने का सबसे बड़ा कारण क्या रहा?
उत्तर : महिला सशक्तीकरण रहा है। कोई न कोई कार्यकर्ता तो चुनना ही था। मैं भी पूरी तरह नहीं जानती, संगठन की जो भी प्राथमिकता रही होगी। मैं तो यही कहूंगी की महिला सशक्तीकरण को ध्यान में रखा गया है।

प्रश्न : पहले चिकित्सक, फिर समाज सेवा, फिर विहिप और अब विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की एक प्रदेशाध्यक्ष तक की यात्रा। इसके बारे में क्या कहेंगी?
उत्तर : चिकित्सक का पेशा रोजी-रोटी का सवाल था। तब भी सेवा का भाव था। समाज सेवा में मेरे बेटे का बहुत बड़ा योगदान है। मेरे बेटे ने स्कूल में एक माक्रो फाइनेंस प्रोजेक्ट चलाया। उसमें वह गरीब महिलाओं को ऊन देकर मफलर बनवाता था। धीरे-धीरे जब उन महिलाओं को काम ज्यादा मिला तो उन महिलाओं ने रुपये एकत्रित कर एक गाय खरीदी। तभी मेरे मन में आया कि जब एक बच्चा ऐसा काम कर सकता है तो मुझे भी समाज सेवा में उतरना चाहिए। इसके बाद मैने चिकित्सा के माध्यम से महिलाओं को जागरूक किया। पानीपत ही नहीं, आस-पास के जिलों के उद्योगों में महिला श्रमिकों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी। विश्व हिंदू परिषद में रहते हुए भी महिलाओं के लिए विशेष कार्य किया। राजनीति में कदम रखा तो जिलाध्यक्ष बनीं। पार्टी ने महिला मोर्चा की जिम्मेदारी भी दी। ऐसे में मुझे पार्टी ने जो भी जिम्मेदारी दी है। मैंने उसे लगन और मेहनत से निभाया।

प्रश्न : बड़ी जिम्मेदारी मिली है। अब समाज सेवा और परिवार के लिए समय कैसे निकाल पाएंगी?
उत्तर : परिवार के सहयोग के बिना आप कुछ भी नहीं कर सकते है। मेरे पति डा. अनिल गुप्ता का भी बहुत बड़ा योगदान है। मेरे दो बच्चे हैं। अब दोनों की शादी हो चुकी है। मुझे परिवार का हर समय सहयोग मिला है। अब भी मिलेगा। समाज सेवा पहले की तरह जारी रहेगी।

व्यक्तिगत परिचय
जन्म : 20 जनवरी 1968, समालखा (पानीपत)
पेशा : रेडियोलाजिस्ट
शिक्षा : एमडी (पीजीआइ रोहतक)
पति : डॉ. अनिल गुप्ता (नेत्र रोग विशेषज्ञ)
बेटा – अविरल, लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स में पढ़ाई
बेटी – आरुषि – मैक्स अस्पताल नई दिल्ली में कार्यरत

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