नीलोखेड़ी/करनाल, 25 मई। विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा, कौशल विकास तथा ग्रामीण विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन से जोडऩे की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी एवं दयाल सिंह कॉलेज करनाल के बीच तीन वर्ष की अवधि के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौता पत्र पर  हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी की ओर से निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान तथा दयाल सिंह कॉलेज की ओर से प्राचार्या डॉ. आशिमा गक्खड़ ने हस्ताक्षर किए । इस समझौते का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था तथा राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित विकास योजनाओं की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोडऩा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान ग्रामीण विकास एवं पंचायत सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है तथा इस एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन, सामुदायिक सहभागिता एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को निकटता से समझने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एमओयू के अनुसार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा दयाल सिंह कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए 4 से 6 सप्ताह की इंटर्नशिप एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रामीण विकास, पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली, सामुदायिक विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी प्रदान की जाएगी। कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का चयन पारदर्शी एवं पारस्परिक सहमति से निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, नवाचार एवं रचनात्मक सोच को ग्रामीण विकास की मुख्यधारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान कौशल तथा सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करेगी। साथ ही उन्हें ग्रामीण भारत की चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा, जिससे वे भविष्य में समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगे।

समझौते के तहत एचआरडीआई विद्यार्थियों को आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं परामर्श उपलब्ध कराएगा तथा उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन कर कॉलेज को फीडबैक प्रदान करेगा। वहीं दयाल सिंह कॉलेज पात्र विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें कार्यक्रमों से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगा तथा प्रशिक्षण अवधि के दौरान संस्थान के साथ समन्वय स्थापित करेगा। कार्यक्रमों के सफल समापन पर विद्यार्थियों को एचआरडीआई द्वारा प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

प्राचार्या डॉ. आशिमा गक्खड़ ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि एचआरडीआई, नीलोखेड़ी के साथ स्थापित यह सहयोग विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, कौशल विकास तथा ग्रामीण विकास की प्रक्रियाओं को निकटता से समझने का अवसर प्रदान करेगा। इससे विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यक्तित्व एवं रोजगार क्षमता में सकारात्मक वृद्धि होगी।

इस अवसर पर हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी के सहायक आचार्य सुशील मेहता, कमलदीप सांगवान सहित संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं दयाल सिंह कॉलेज, करनाल की ओर से इंटर्नशिप समन्वयक डॉ. देवेंद्र, सुपरवाइजर डॉ. पवन कुमार तथा अन्य प्राध्यापक गण मौजूद रहे। उपस्थित शिक्षाविदों ने इस एमओयू को विद्यार्थियों के कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनकी समझ को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह शैक्षणिक सहयोग विद्यार्थियों को नई सीख, व्यावहारिक अनुभव एवं बेहतर भविष्य निर्माण के अवसर प्रदान करेगा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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